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नये मुकाम पर पीवी सिंधु

Updated at : 20 Jul 2022 7:56 AM (IST)
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नये मुकाम पर पीवी सिंधु

पीवी सिंधु जैसे आइकन के आने से किशोरों व युवाओं में ओलिंपिक खेलों में भी अच्छा करने की प्रेरणा मिली है.

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सिंगापुर ओपेन ट्रॉफी में पीवी सिंधु की जीत भारतीय बैडमिंटन के इतिहास की शानदार परिघटना है. इस साल यह उनकी तीसरी लगातार जीत है. वे इस माह के अंत में शुरू होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी. सिंधु की जीत के हवाले से कुछ बातें जेहन में आती हैं. एक तो यह कि ओलिंपिक या वैश्विक स्तर पर जो प्रतिष्ठित खेल हैं, उनमें किसी खेल में अगर भारत बहुत मजबूती से प्रदर्शन कर रहा है, तो वह बैडमिंटन है.

इस खेल में साइना नेहवाल से शुरू हुई यात्रा नये मुकाम की ओर जाती दिख रही है. नेहवाल के बाद से ऐसा कोई ओलिंपिक आयोजन नहीं है, जिसमें भारत ने बैडमिंटन में पदक न हासिल किया हो. दो पदक तो सिंधु ही जीत चुकी हैं. नेहवाल ने एक मेडल लंदन ओलिंपिक में जीता था. दूसरी बात यह है कि जो खिलाड़ी पदक पाने में कामयाब नहीं रहे, उनका प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा और वे मुकाबले में अंत तक जमे रहे थे. अगर हम दो साल बाद के ओलिंपिक को देखते हैं, तो सिंधु समेत कई ऐसे भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं, जो मेडल के हकदार नजर आते हैं.

हाल ही में भारत ने बैडमिंटन का प्रतिष्ठित थॉमस कप जीता है. वह जीत किसी भी खेल के टीम इवेंट के इतिहास में भारत की सबसे बड़ी जीत है. कई लोग इस बात से इनकार कर सकते हैं, पर मेरी राय यही है कि यह 1983 के क्रिकेट विश्व कप से भी बड़ी जीत थी. हम ओलिंपिक में जो गोल्ड मेडल जीतते रहे थे, उससे भी बड़ी जीत थॉमस कप की इसलिए है कि वैश्विक स्तर पर बैडमिंटन सबसे अधिक प्रतिस्पर्द्धा वाला खेल है.

सौ से अधिक देश गंभीरता से बैडमिंटन खेलते हैं. अगर हम ओलिंपिक हॉकी के इतिहास को देखें, तो उस समय लगभग आधा दर्जन देश ही मुख्य रूप से हावी थे. क्रिकेट को या किसी भी खेल को मैं कमतर नहीं आंकता, पर यह सच है कि एक दर्जन से भी कम देश गंभीर क्रिकेट खेलते हैं. पीवी सिंधु की यात्रा को अगर आप देखें, उनकी तरह व्यक्तिगत खेलों में उपलब्धियां हासिल करने वाला और कोई खिलाड़ी किसी भी खेल में नजर नहीं आता.

इसकी वजह यह है कि उनके पास विश्व चैंपियन का खिताब है, ओलिंपिक के मेडल हैं और कई विश्व स्तर की अन्य जीतें हैं. बैडमिंटन में चाहे हम प्रकाश पादुकोण का नाम लें, पी गोपीचंद का नाम लें, साइना नेहवाल का नाम लें, इन सबसे लंबी लकीर पीवी सिंधु ने खींच दी है. हम यह जरूर चाहते हैं कि वे ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप भी जीतें क्योंकि भारत में उसे एक प्रतिष्ठित टूर्नामेंट माना जाता है. इस टूर्नामेंट को छोड़ दें, तो अन्य सभी बड़े आयोजनों में सिंधु ने नाम हासिल किया है.

यह सवाल स्वभाविक है कि अब पीवी सिंधु का करियर किस ओर जायेगा. बीते कुछ वर्षों की उनकी यात्रा को देखें, तो यह साफ दिखता है कि उन्होंने यह अच्छी तरह सीख लिया है कि उन्हें कब ऊपर उठना है. तोक्यो ओलिंपिक के समय यह कहा जा रहा था कि सिंधु फॉर्म में नहीं है, लेकिन ठीक ओलिंपिक से पहले उन्होंने अपने को पिक किया और मेडल लेकर आयीं.

विश्व चैंपियनशिप के दौरान कहा जा रहा था कि सिंधु सिल्वर मेडल ही क्यों पाती हैं. तब उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था. ऐसा ही इंडोनेशिया ओपेन और सिंगापुर ओपेन में भी हुआ. इसका सीधा मतलब है कि जो खिलाड़ी अपने को पिक करना जानता है, वह अपने करियर को लंबा करना भी जानता है. इसे देखते हुए लगता है कि आगामी कुछ वर्षों, जिनमें ओलिंपिक भी शामिल है, में पीवी सिंधु कड़ी टक्कर देती रहेंगी. इसमें कोई संदेह की गुंजाइश नहीं है. वे लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं, सो उम्मीदें भी हैं.

भारतीय बैडमिंटन (महिला व पुरुष दोनों) में अच्छे खिलाड़ियों का एक समूह उभर कर सामने आया है. लक्ष्य सेन से बहुत अपेक्षाएं हैं. ये खिलाड़ी भारतीय बुलंदी के झंडे को आगे ले जाने में सक्षम हैं. हम भारतीय बैडमिंटन की सक्सेस स्टोरी को पुलेला गोपीचंद की एकेडमी तक ले जाकर रोक देते हैं. लेकिन देश में अनेक ऐसे प्रशिक्षण केंद्र बने हैं, जहां अच्छे खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं और वे प्रकाश पादुकोण, नेहवाल, गोपीचंद, सिंधु जैसे खिलाड़ियों को आदर्श मानकर अपने को बेहतर बना रहे हैं.

उनमें भी यह आत्मविश्वास पैदा हो रहा है कि इन खिलाड़ियों की तरह वे भी अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन में अपना नाम कर सकते हैं. पहले के दौर में यह माना जाता था कि केवल क्रिकेट खिलाड़ी ही आइकन हो सकते हैं, कपिल देव, सचिन तेंदुलकर, एमएस धौनी, विराट कोहली जैसे कई क्रिकेटर युवाओं के आदर्श बने. पर बीते कुछ सालों में परिदृश्य तेजी से बदला है.

पीवी सिंधु जैसे आइकन के आने से किशोरों व युवाओं में ओलिंपिक खेलों में भी अच्छा करने की प्रेरणा मिली है. सिंधु की पारिवारिक पृष्ठभूमि मध्यवर्गीय है. उनके माता-पिता वॉलीबॉल खिलाड़ी रहे. उनकी बहन डॉक्टर हैं. ऐसे परिवार के एक सदस्य को बैडमिंटन से जोड़ना और उस पर पूरा दांव लगाना निश्चित ही उत्साहजनक उदाहरण है. आने वाले समय में हमें अनेक खेलों में ऐसे स्टार देखने को मिल सकते हैं.

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अभिषेक दुबे

लेखक के बारे में

By अभिषेक दुबे

अभिषेक दुबे is a contributor at Prabhat Khabar.

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