ePaper

मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा

Updated at : 18 Jul 2022 8:29 AM (IST)
विज्ञापन
मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा

साल 2019 में 6.97 लाख लोग उपचार के लिए भारत आये थे. उस साल भारत पहुंचे कुल विदेशी पर्यटकों में से 6.4 प्रतिशत उपचार के लिए आये थे.

विज्ञापन

हमारा देश दुनिया का दवाखाना कहा जाता है. वित्त वर्ष 2021-22 में भारत ने 24.4 अरब डॉलर मूल्य की दवाओं का निर्यात किया था, जो 2020-21 की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक था. दवाओं की मात्रा के हिसाब से भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है. केंद्र सरकार निर्यात बढ़ाने के साथ देश की स्वास्थ्य सेवा की बेहतरी के लिए भी प्रयासरत है. सस्ते और अच्छे इलाज के लिए कई देशों से मरीज भी भारत आते हैं.

‘मेडिकल टूरिज्म’ (चिकित्सा पर्यटन) के नाम से ख्यात इस सेवा क्षेत्र के विस्तार पर भी सरकार ने ध्यान देना शुरू किया है. आकलनों की मानें, तो इस क्षेत्र का वैश्विक बाजार 60 से 80 अरब डॉलर का है. स्वास्थ्य संबंधी अन्य सेवाओं का बाजार तो 640 अरब डॉलर के आसपास है. हमारे अस्पतालों और चिकित्सकों के प्रति अन्य देशों के लोगों के भरोसे को इस आंकड़े से समझा जा सकता है कि 2019 में 6.97 लाख लोग उपचार के लिए भारत आये थे.

उस साल भारत पहुंचे कुल विदेशी पर्यटकों में से 6.4 प्रतिशत उपचार के उद्देश्य से आये थे. उसके बाद के दो साल दुनिया कोरोना महामारी की चपेट में थी, तो रोगियों का आना बहुत मुश्किल हो गया था. इसके बावजूद 2020 में 1.83 लाख लोग स्वास्थ्य सेवा के लिए भारत पहुंचे थे. जहाजों की आवाजाही बहाल होने से यह उम्मीद बंधी है कि अब बड़ी संख्या में लोग हमारे अस्पतालों में आयेंगे.

सरकार ने ऐसे लोगों को सहूलियत मुहैया कराने की दिशा में अनेक कदम उठाये हैं. वीजा और अन्य दस्तावेजों को हासिल करना आसान बनाने के साथ एक विशेष कार्यक्रम ‘हील इन इंडिया’ (भारत में स्वास्थ्य लाभ करें) की शुरुआत की गयी है. इसके अलावा, मेडिकल टूरिज्म की परिभाषा को विस्तार देते हुए इसमें आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को भी जोड़ा गया है.

स्वास्थ्य मंत्रालय अन्य कई मंत्रालयों, जैसे- पर्यटन, नागरिक उड्डयन, वाणिज्य, आयुष आदि, को भी इस अभियान में सक्रियता से जोड़ा है. विदेशों से स्वास्थ्य सेवा हासिल करने के लिए आ रहे लोगों को हर तरह से सुविधाएं और संसाधन मिल सकें, इसे सुनिश्चित करने के लिए कुछ राज्य सरकारों और अस्पतालों का भी सहयोग लिया जा रहा है. आम तौर पर वीजा लेने की प्रक्रिया कुछ जटिल होती है और कई बार इसमें देरी भी होती है.

बीमार व्यक्ति के लिए इससे समस्याएं बढ़ सकती हैं. इसके समाधान के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय एक विशेष आयुष वीजा श्रेणी बनाने जा रहा है. इससे यह जान पाना भी आसान हो जायेगा कि कितने लोग किस तरह की सेवाओं के लिए भारत आ रहे हैं. मेडिकल टूरिज्म में नियमन न होने, बिचौलियों के प्रभाव, बीमा संबंधी समस्याओं, आयुष सुविधाओं को बाहर मान्यता न होने जैसी बाधाओं से क्षेत्र का विकास अवरुद्ध है. इन खामियों को दूर कर हम बहुत अधिक संख्या में विदेशियों को आकर्षित कर सकते हैं. केंद्र सरकार की व्यवस्थित पहल से समाधान की आशा की जा सकती है.

विज्ञापन
संपादकीय

लेखक के बारे में

By संपादकीय

संपादकीय is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola