लाखों युवाओं को रोजगार देने में सक्षम होगी ऑरेंज इकोनॉमी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
Orange economy : आर्थिक सर्वेक्षण में भी उल्लेख किया गया है कि भारत का मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र, सेवा अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ बनकर उभरा है, जिसमें ऑडियो-विजुअल उत्पादन, प्रसारण, डिजिटल कंटेंट, एनिमेशन, गेमिंग, विज्ञापन और लाइव मनोरंजन शामिल हैं.
Orange economy : इस वर्ष बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑरेंज इकोनॉमी की चर्चा की. प्रधानमंत्री मोदी भी इसे लेकर काफी उत्साहित हैं. ऐसे में सभी जानना चाहते हैं कि आखिर यह है क्या और काम कैसे करती है. दरअसल, यह हमारी नॉलेज बेस्ड इकोनॉमी (ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था) का ही हिस्सा है, जो तेजी से आगे बढ़ रहा है. यह इकोनॉमी के उस हिस्से को कहा जाता है जो सृजनात्मकता, संस्कृति और इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी (बौद्धिक संपदा) से दौड़ता है.
यह मुख्य रूप से विचारों, ज्ञान, कलात्मक अभिव्यक्ति तथा सांस्कृतिक विषय वस्तु से चलता है. इस समय क्रिएटर्स इकोनॉमी बहुत बड़ी इकोनॉमी है और लाखों नौजवानों को प्रेरित कर रही है. भारत के एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) क्षेत्र की तेज वृद्धि को रेखांकित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि 2030 तक इस उद्योग को लगभग 20 लाख पेशेवरों की आवश्यकता होगी.
इस विस्तारित पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन देने के लिए उन्होंने मुंबई स्थित इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (आइआइसीटी) को देशभर के 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित करने के लिए सहायता देने का प्रस्ताव रखा. ये लैब युवाओं के लिए नये रचनात्मक करियर का अवसर खोलेंगे. यह पहल भविष्य के लिए तैयार कार्यबल के निर्माण, भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और देशभर के छात्रों के लिए अवसरों का विस्तार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. दुनिया के लिए यह नया बेंचमार्क भी है.
आर्थिक सर्वेक्षण में भी उल्लेख किया गया है कि भारत का मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र, सेवा अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ बनकर उभरा है, जिसमें ऑडियो-विजुअल उत्पादन, प्रसारण, डिजिटल कंटेंट, एनिमेशन, गेमिंग, विज्ञापन और लाइव मनोरंजन शामिल हैं. पिछले एक दशक में यह क्षेत्र तेजी से डिजिटल और प्लेटफॉर्म आधारित वितरण की ओर बढ़ा है, जिससे राजस्व मॉडल, रोजगार और मूल्य शृंखलाओं में व्यापक परिवर्तन आया है. ‘फोर्ब्स’ पत्रिका में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि इ-स्पोर्ट्स और क्रिएटिव क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है.
एक भारतीय कंपनी के सीइओ ने भी इसकी पुष्टि की और कहा कि तीव्र विकास के कारण भारत को दुनिया के साथ कदमताल करने के लिए सुनियोजित ढंग से कौशल विकास की अति शीघ्र जरूरत है. एक अन्य कंपनी के शीर्ष मैनेजर ने कहा कि भारत में क्रिएटरों की एक पूरी पीढ़ी की जरूरत है जिनमें मौलिक क्षमता हो, ताकि वे बौद्धिक संपदा का इस्तेमाल कर गति बनाये रखें. भारत के पास ऐसे लोगों की एक पूरी पीढ़ी तैयार करने की क्षमता है. इस तरह के कदमों से न केवल युवा भारतीयों के सार्थक करियर का मार्ग प्रशस्त होगा, बल्कि देश को एनिमेशन, गेमिंग और डिजिटल स्टोरीटेलिंग में विश्व में शीर्ष पर स्थापित होने का मौका भी मिलेगा.
वित्त मंत्री के घोषित इन कदमों से अब परंपरागत अर्थव्यवस्था से हटकर एक बदलाव दिखाई दे रहा है. यह महज सांस्कृतिक या एंटरटेनमेंट सेगमेंट नहीं है, बल्कि तेजी से विकास करने वाला, रोजगार देने वाला डिजिटल स्तंभ है, जो वैश्विक स्तर के कंटेंट, निर्यात की जा सकने वाली बौद्धिक संपदा के जरिये लाखों युवाओं को रोजगार देने की क्षमता रखता है. भारत के गेमिंग उद्योग की चर्चा करें, तो इस क्षेत्र में भी भारी वृद्धि हुई है और इस समय देश में 56 करोड़ से भी ज्यादा लोग इसमें रुचि ले रहे हैं और इसका बाजार 10 अरब डॉलर का है, जिसके 2030 तक 15-16 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है.
एशिया में इसका बाजार सबसे तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि इसमें अभी उच्च जीएसटी दर तथा सरकारी नियम बाधा बन रहे हैं, लेकिन वित्त मंत्री के बजट भाषण के बाद तस्वीर स्पष्ट हो रही है और भविष्य के लिए उम्मीदें जग रही है. दरअसल, भारत में स्मार्टफोन और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के कारण गेमिंग उद्योग फल-फूल रहा है. इसमें इस समय विदेशों से भी बड़े पैमाने पर निवेश आ रहे हैं. अभी विदेशी निवेश के नियम थोड़े जटिल हैं, पर आने वाले समय में इसके सरल हो जाने की उम्मीद है.
इसी तरह, एनिमेशन के क्षेत्र में भी भारी तरक्की हो रही है. भारत में टीवी चैनलों और ओटीटी प्लेटफॉर्मों के विकास के कारण भी एनिमेशन की मांग बढ़ रही है. हमारे पास इस समय प्रतिभाशाली और कुशल युवाओं की एक पूरी पौध है. इस कारण यहां भी विदेशी निवेश हो रहा है. विदेशों में इस तरह के कंटेंट अब भारत से आउटसोर्स किये जा रहे हैं. इसका कारण है कि भारत में इनकी लागत दर पश्चिमी देशों की तुलना में बहुत ही कम है, क्योंकि देश में एनिमेशन बहुत ही सस्ती दरों पर तैयार होते हैं.
साथ ही इनकी क्वालिटी भी बहुत अच्छी है. इस क्षेत्र में भारतीय एआइ का इस्तेमाल भी धड़ल्ले से कर रहे हैं. उनके पास आधुनिकतम सॉफ्टवेयर हैं तथा वे जटिल एनिमेशन तैयार करने में भी समर्थ हैं. ऐसे में सरकार की थोड़ी मदद और सरकारी नियमों में ढिलाई से यह क्षेत्र और छलांग लगा सकता है. सरकार को चाहिए कि वह इन क्षेत्रों को थोड़ा और संरक्षण दे, ताकि ये तेजी से आगे बढ़ें. बहरहाल, वित्त मंत्री ने सही समय पर सही विषय उठाया है और एक नयी अर्थव्यवस्था की ओर सभी का ध्यान खींचा है. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)
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