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देश के खिलौने

Updated at : 24 Aug 2020 8:29 AM (IST)
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देश के खिलौने

आत्मनिर्भरता और स्थानीयता के अपने संदेश एवं संकल्प को विस्तार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में खिलौनों का उत्पादन बढ़ाने तथा वैश्विक बाजार में उन्हें पहुंचाने का आह्वान किया है.

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आत्मनिर्भरता और स्थानीयता के अपने संदेश एवं संकल्प को विस्तार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में खिलौनों का उत्पादन बढ़ाने तथा वैश्विक बाजार में उन्हें पहुंचाने का आह्वान किया है. वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों के साथ एक बैठक में उन्होंने कहा है कि खिलौने बनाने के अनेक केंद्रों तथा बड़ी संख्या में दस्तकारों की उपलब्धता का उपयोग कर देशी खिलौने के विस्तार से बच्चों में सांस्कृतिक जुड़ाव और मानसिक कौशल का विकास किया जा सकता है.

उल्लेखनीय है कि बड़ी आबादी होने की वजह से भारत खिलौनों का भी बड़ा बाजार है. साल 2019-20 की अवधि में लगभग चार हजार करोड़ रुपये मूल्य के खिलौने विदेशों से आयात किये गये थे, जिनमें से 70 प्रतिशत के आसपास चीनी खिलौने थे. कुछ जानकारों का मानना है कि यह मात्रा अधिक भी हो सकती है क्योंकि कुछ खिलौने अन्य श्रेणियों में या पुर्जों के रूप में भी मंगाये जाते हैं. यह भी आशंका जतायी जाती रही है कि कई अन्य चीजों की तरह भारतीय बाजार को सस्ते खिलौने से पाटने की कोशिश भी चीन की ओर से होती है.

भारतीय खिलौनों के निर्यात की तुलना में आयात चार गुना अधिक है. यदि भारतीय खिलौनों के विकास पर सरकार और समाज की ओर समुचित ध्यान दिया जाता है, इससे पारंपरिक दस्तकारी को भी बढ़ावा मिलेगा और उन खिलौनों के साथ जुड़े सांस्कृतिक आयामों को भी बच्चों को परिचित कराया जा सकेगा. इससे रोजगार और आय का रास्ता भी खुलेगा. एक बड़ा पहलू स्वास्थ्य और पर्यावरण का है.

आयातित खिलौनों में इस्तेमाल होनेवाले पदार्थ बच्चों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं तथा वातावरण में प्रदूषण को बढ़ाने का एक कारण बन सकते हैं. ऐसे अध्ययन हमारे सामने हैं, जिनमें बताया गया है कि चीन व कुछ अन्य देशों से आनेवाले खिलौनों में हानिकारक रसायन मौजूद हैं. इनकी तुलना में परंपरागत खिलौने हर तरह से सुरक्षित हैं और औद्योगिक स्तर पर बननेवाले खिलौनों पर संबद्ध सरकारी विभाग निगरानी कर गुणवत्ता को सुनिश्चित कर सकते हैं.

इसी बीच केंद्र सरकार ने यह महत्वपूर्ण निर्णय किया है कि भारतीय गुणवत्ता ब्यूरो के अधिकारी सात बंदरगाहों पर तैनात किये जायेंगे, जिनकी जिम्मेदारी खिलौनों की जांच करना होगी. निर्धारित मानकों पर खरे उतरने के बाद ही उन्हें देश में लाने की अनुमति दी जायेगी. इस प्रक्रिया में विदेशों में स्थित खिलौनों के उन कारखानों का भी मुआयना करना शामिल है, जहां से उन्हें आयात किया जाता है.

इससे घटिया सामान भेजने और लाने की भ्रष्ट और लापरवाह कोशिशों पर लगाम लगने की उम्मीद है. घरेलू उद्योगों और उद्यमिता पर ध्यान देकर ही आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को पाया जा सकता है तथा निर्यात को बढ़ाया जा सकता है. जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया है, नयी पीढ़ी की रुचियों के मुताबिक डिजिटल गेम के क्षेत्र में भी काम करने की जरूरत है तथा उसमें भी पौराणिक और लोक कथाओं को आधार बनाया जा सकता है.

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