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वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का बढ़ेगा कद

Updated at : 01 Jan 2026 6:15 AM (IST)
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India 2026

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का बढ़ेगा कद

India 2026: भारत में एआइ पर एक वैश्विक सम्मेलन इस साल होने वाला है, जिसमें दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति रहेगी. भारत ब्रिक्स की भी मेजबानी करेगा. लिहाजा उसमें रूसी और चीनी राष्ट्रपतियों की मौजूदगी भी भारत का कद बढ़ायेगी.

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India 2026: नया वर्ष भारत के लिए नवीन संभावनाओं का वर्ष है. हालांकि इसमें भी दो राय नहीं कि चुनौतियां भी उतनी ही हैं. इस वर्ष की शुरुआत से ही पूरी दुनिया की उत्सुक निगाह इस पर रहेगी कि यूक्रेन-रूस के बीच शांति समझौता आखिरकार हो पाता है या नहीं. हालांकि जिस तरह से रूसी राष्ट्रपति पुतिन के आवास को निशाना बनाये जाने की बात सामने आयी है, उससे फिलहाल लगता नहीं कि यूक्रेन युद्ध का हल इतनी जल्दी निकल पायेगा. जहां तक भारत की बात है, तो वैश्विक परिदृश्य में भारत का सितारा चमकेगा. लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं. इस वर्ष पड़ोसी देशों में से सबसे बड़ी चुनौती बांग्लादेश से मिलने की आशंका है, जहां पाकिस्तान, तुर्की, चीन और अमेरिका खेल करने की कोशिश में लगे हुए हैं. आने वाले दिनों में वहां कट्टरता और ज्यादा दिख सकती है, और चुनाव के बाद जो सरकार बनेगी, वह भारत-विरोधी हो, तो आश्चर्य नहीं. वैसे भी वहां भारत-विरोधी कट्टरता जिस तरह दिख रही है, वह चौंकाती है. हालांकि बांग्लादेश को यह बात समझनी होगी कि जो भी सरकार वहां सत्ता में आती है, भारत उसकी मदद ही करता है. और इस बार भी भारत ने वहां निष्पक्ष चुनाव होने की कामना की है. लेकिन इस वर्ष बांग्लादेश पर सतर्क नजर रखनी पड़ेगी.

दूसरी बड़ी चुनौती, जाहिर है, पाकिस्तान है, जो पिछले चार दशकों से भारत विरोधी अभियान में लगा हुआ है. चूंकि इधर अमेरिका से उसके रिश्ते बेहतर हुए हैं, इसलिए वह अपना भारत विरोधी अभियान जारी रखेगा, भले ही उसकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब ही क्यों न हो. ऑपरेशन सिंदूर में अपने कमतर रक्षा उपकरणों की परीक्षा के बाद चीन ने पाकिस्तान को उच्च गुणवत्ता वाले हथियार दिये हैं, तो अमेरिका ने एफ-16 विमानों के लिए अतिरिक्त फंडिग की है, जो पाकिस्तान को दुस्साहस के लिए दुष्प्रेरित कर सकती है. बड़ी बात यह है कि पिछले कुछ वर्षों तक उपेक्षित और अलग-थलग रहने के बाद पश्चिम एशिया में उसने फिर से अपनी मजबूत जगह बना ली है. इस संदर्भ में सऊदी अरब से हुए उसके सैन्य समझौते को देखा जा सकता है. कतर और तुर्की से भी उसके रिश्ते बेहतर हुए हैं. वह गाजा में अपना सैन्य बल भेजने वाला है और कुल मिला कर पश्चिम एशिया में सिक्योरिटी प्रोवाइडर की भूमिका में आ रहा है, जो भारत के लिए बड़ी चिंता की बात हो सकती है. बाकी पड़ोसियों की बात करें, तो श्रीलंका, नेपाल, भूटान और मालदीव से हमारे बेहतर संबंध इस साल बने रहने वाले हैं. श्रीलंका की मदद भारत ने की ही है.

नेपाल में अस्थिरता के बावजूद स्थिति भारत के लिए संतोषजनक ही रहने की उम्मीद है, बड़ी शक्तियों की बात करें, तो रूस के साथ हमारे संबंध पुराने और मजबूत हैं. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया भारत यात्रा दोतरफा संबंधों की मजबूती के बारे में बताती है. चीन के साथ हमारे संबंध धीरे-धीरे सुधर रहे हैं और यह प्रक्रिया इस साल भी जारी रहने की उम्मीद है. यूरोप के साथ हमारे संबंध पहले की तुलना में काफी सुधरे हैं. भारत के विशाल बाजार ने यूरोप को पहले ही हमारी तरफ आकर्षित किया है. तिस पर अमेरिका के साथ पहले जैसा रिश्ता न होने के कारण भी यूरोप के देश भारत से संबंध बेहतर करने के इच्छुक हैं. आगामी 26 जनवरी को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा मुख्य अतिथि होंगे और इस अवसर पर यदि यूरोपीय के साथ हमारा मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) हो जाता है, तो यह बड़ी सफलता होगी. यूरोपीय देशों के साथ बेहतर संबंधों का यह सिलसिला इस साल जारी रहने वाला है.

बड़ी शक्तियों में इस साल भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती नि:संंदेह अमेरिका है. अगर इस साल की शुरुआत में अमेरिका के साथ हमारा व्यापार समझौता हो जाता है, भारतीय उत्पादों पर लगाया गया अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ अमेरिका हटा लेता है, और भारत में होने वाले क्वाड शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नयी दिल्ली आते हैं, तभी हम मान सकते हैं कि महाशक्ति देश के साथ हमारे रिश्ते सुधरे हैं. अमेरिका के साथ होने वाला व्यापार समझौता नि:संदेह इस वर्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होने वाली है. हाल के दिनों में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एशिया-प्रशांत के संदर्भ में तीन बार भारत के महत्व का उल्लेख किया है, जो दोतरफा रिश्तों में उम्मीद जगाता है. लेकिन अमेरिका में होता वही है, जो ट्रंप चाहते हैं, और इन दिनों आसिम मुनीर से उनकी नजदीकी भारत-अमेरिका रिश्ते के लिए चिंताजनक है. बीते साल ट्रंप ने पाक सत्ता राजनीति को पीछे हटा कर जिस तरह मुनीर को अपना दोस्त चुना, वह सिलसिला अगर जारी रहा, तो हमारी मुश्किलें बढ़ेंगी.

अलबत्ता यह वर्ष भारत के लिए वैश्विक उपलब्धियों का वर्ष होगा, इसमें संदेह नहीं. भारत में एआइ पर एक वैश्विक सम्मेलन इस साल होने वाला है, जिसमें दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति रहेगी. पिछले साल फ्रांस में एआइ पर जो पहला वैश्विक सम्मेलन हुआ था, यह उसी का विस्तार होगा. यह सम्मेलन भी भारत का वैश्विक कद बढ़ायेगा. चूंकि भारत ब्रिक्स की भी मेजबानी करेगा, लिहाजा उस अवसर पर रूसी और चीनी राष्ट्रपतियों की मौजूदगी भी भारत का कद बढ़ायेगी. जहां तक अर्थव्यवस्था की बात है, तो 2025 में भारत सबसे तेज रफ्तार वाली अर्थव्यवस्था बना रहा, और वैश्विक स्थिति को देखते हुए इस साल भी भारत सबसे आगे रहेगा. और सच तो यह है कि वैश्विक कूटनीति में भारत की मजबूती का एक बड़ा कारण आर्थिक मोर्चे पर भारत का लगातार शानदार प्रदर्शन है.(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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अनिल त्रिगुणायत

लेखक के बारे में

By अनिल त्रिगुणायत

अनिल त्रिगुणायत is a contributor at Prabhat Khabar.

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