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पाकिस्तान को मिला उसके किये का जवाब

Updated at : 15 May 2025 8:13 AM (IST)
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terrorist attack

आतंकवाद एक लो कॉस्ट ऑप्शन

India Pakistan Conflict : पाकिस्तान एक ऐसा देश है जहां जेल में बंद कैदियों को भी बाहर निकालकर आतंकी प्रशिक्षण दिया जाता है और फिर भारत में हमला करने के लिए भेजा जाता है. इस काम के लिए बाकायदा उन्हें पैसे मिलते हैं.

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India Pakistan Conflict : जब कश्मीर में आतंकवाद जोरों पर था, तब मैं अनंतनाग में सेक्टर कमांडर था. इस कारण मुझे आतंकवाद को समझने में मदद मिली. आतंकवाद एक लो कॉस्ट ऑप्शन है, इसमें खर्चा ज्यादा नहीं होता. पाकिस्तान बार-बार इसलिए ऐसा करता है, क्योंकि वह भारत के साथ कन्वेंशनल वार, यानी असली लड़ाई लड़ने की हालत में नहीं है. हम उससे कई गुना अधिक शक्तिशाली हैं. इसी कारण पहले आतंकियों ने पुलवामा में हमला कर दिया और उसके बाद गायब हो गये. हमारी सेना उन्हें तलाशती रही. अभी पहलगाम में हमला कर दिया, एक बार फिर हमारी सेना उनकी तलाश में जुट गयी है. पर अच्छी बात यह रही कि पहलगाम के बाद हमने सख्त प्रतिक्रिया दी है. पुलवामा के बाद हमारी प्रतिक्रिया इतनी सख्त नहीं थी. परंतु, पाकिस्तान को जवाब देने की शुरुआत वहां से हो गयी थी.


देखिए, तीन चीजों पर आतंकवाद पलता है. पहली चीज है, लोकल सपोर्ट. इसके बिना आतंकवाद नहीं पनप सकता. वैसे लोग जो पहले आतंकवादी रह चुके हैं और बाद में आत्मसमर्पण कर दिया, वे आतंकियों को छिपाने, उन्हें रखने और उनके हाइडआउट में खाना पहुंचाने में मदद करते हैं. हालांकि पहले से यह कम हो गया है. आतंकवाद के पलने के लिए दूसरी जरूरी बात है कि किसी भी देश का अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर आतंकियों को मिलना चाहिए. क्योंकि जब भी इन पर दबाव बनता है ये अंतरराष्ट्रीय सीमा से दूसरी ओर पार हो जाते हैं. इनके हथियार की, सामान की जरूरतोें को दूसरी तरफ से पूरा कर दिया जाता है.

पाकिस्तान एक ऐसा देश है जहां जेल में बंद कैदियों को भी बाहर निकालकर आतंकी प्रशिक्षण दिया जाता है और फिर भारत में हमला करने के लिए भेजा जाता है. इस काम के लिए बाकायदा उन्हें पैसे मिलते हैं. ऐसे में कैदियों को लगता है कि एक तो जेल से आजादी मिल जायेगी, दूसरे इस काम के मोटे पैसे मिलेंगे. और यह सब आइएसआइ करवाती है. आतंक के फलते-फूलते रहने का तीसरा कारण है इस्लाम के नाम पर इनका कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाना.


अब बात पहलगाम हमले की. यह सब कुछ शत-प्रतिशत विदेशी आतंकवादियों की अगुवाई में हुआ है. पर यह सच है कि उनके साथ स्थानीय आतंकवादी भी थे. पूर्व आतंकवादियों का साथ उन्हें मिला. पहले आतंकी फायरिंग कर या कुछ लोगों को मार कर भाग जाते थे, पर यह बात पहली बार सुनी कि आतंकियों ने कलमा पढ़ने, पैंट उतारने को कहा. यह बहुत निम्न स्तर का आतंकवाद है. एक बात और, आतंकियों ने वारदात को अंजाम देने के लिए एकदम सही जगह चुनी. जगह ऐसी जहां एक घंटे का पैदल का रास्ता था. वहां पुलिस की कोई पोस्ट भी नहीं थी. इस एरिया को खोलने से पहले टूर मैनेजर को पुलिस की अनुमति लेकर वहां पुलिस या आर्मी की पिकेट लगवानी चाहिए थी. आर्मी की यदि एक पिकेट भी वहां होती, तो जिस तरह खुलेआम कत्लेआम हुआ, वह नहीं हुआ होता. टूर मैनेजर और प्रशासन के बीच तालमेल नहीं होने से यह घटना घटी. हमें समझना होगा कि कश्मीर अभी भी एक सुरक्षित स्थान नहीं है. आतंकियों को भागने का भी पूरा समय मिला, क्योंकि रिएक्शन टाइम बहुत अधिक था.


इस घटना के बाद हमने समय जरूर लगाया, पर पाकिस्तान को उसके किये की बड़ी सजा दी. उसके नौ आतंकी कैंप ध्वस्त कर डाले. प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्रालय दुनिया को यह समझाने में सफल रहे कि हमने सिविल एरिया और आर्मी एरिया पर कोई हमला नहीं किया, हमने केवल आतंकी शिविरों को निशाना बनाया है. इस कारण इसे लड़ाई नहीं माना गया और दुनिया के देश हमारे साथ खड़े रहे. भारत की तरफ से जिन नौ आतंकी शिविरों को निशाना बनाया गया, उनमें सौ के करीब आतंकवादी और उनके पांच सरगना मारे गये. यही वह कारण है कि जब इन आतंकवादियों की अंत्येष्टि हुई, तो उसमें पाकिस्तान आर्मी के बड़े अधिकारी भी शामिल रहे. अपनी इसी हरकत से पाकिस्तान की पोल दुनिया के सामने खुल गयी कि वह आतंकवादियों को समर्थन देता है. दूसरी ओर, सीजफायर का उल्लंघन करते हुए पाकिस्तान ने सिविल एरिया और हमारे धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया, पर हमारे अत्याधुनिक हथियारों के सामने वह टिक नहीं पाया.


जहां तक पहलगाम आतंकी हमले के कारण की बात है, तो असीम मुनीर नवंबर में रिटायर हो रहा है. वह अपना कार्यकाल तीन वर्ष और बढ़ाना चाहता है. पाकिस्तान में लोग मुनीर के खिलाफ भी हो गये हैं. तो यह सारा खेल लोगों के बीच अपनी छवि सुधारने के लिए खेला गया. एक और कारण भारत में गृहयुद्ध भड़काना भी था. पर देश में लोग समझने लगे हैं कि आपस में झगड़ने से कोई लाभ नहीं है. रही बात सीजफायर की, तो हमने अपनी शर्तों पर सीजफायर किया है. शर्त यह कि हमने जो सिंधु जल संधि स्थगित किया है, उससे पीछे नहीं हटेंगे. यदि कोई भी आतंकवादी हरकत पाकिस्तान की तरफ से होती है, तो हम उसे लड़ाई मानेंगे और जवाबी कार्रवाई करेंगे.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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मेजर जनरल एसएस अहलावत

लेखक के बारे में

By मेजर जनरल एसएस अहलावत

मेजर जनरल एसएस अहलावत is a contributor at Prabhat Khabar.

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