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गंदगी से मुक्ति

Updated at : 10 Aug 2020 12:53 AM (IST)
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गंदगी से मुक्ति

स्वच्छता पर जोर की वजह से स्वास्थ्य और जीवन-स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है. अभियान के चलते भूजल तथा सतही जल के प्रदूषण में भी कमी आ रही है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को कूड़े-कचरे से छुटकारा दिलाने के लिए एक सप्ताह तक विशेष अभियान छेड़ने का आह्वान किया है. छह वर्ष पूर्व प्रारंभ हुए स्वच्छ भारत अभियान ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं और अब देश को उससे आगे बढ़ना है. अभियान के अनुभवों को संजोने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छता केंद्र की स्थापना की गयी है. इसके उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कचरा प्रबंधन के माध्यम से कूड़ा-करकट का उपयोग खाद बनाने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए. इस अभियान की सफलता का अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि दो अक्टूबर, 2014 से 10.29 करोड़ शौचालय बने हैं तथा शौचालययुक्त परिवारों की संख्या में 61 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है. खुले में शौच की विवशता से देश लगभग मुक्त हो चुका है.

तीस राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने इस मुक्ति की घोषणा कर दी है. चूंकि हमारी आबादी का बड़ा हिस्सा गरीब है और सुविधाओं-संसाधनों की वंचना का शिकार भी अधिकतर यही तबका रहा है, सो बड़े पैमाने पर शौचालयों के बनने का सीधा लाभ भी इन्हें हुआ है. स्वच्छता पर जोर की वजह से स्वास्थ्य और जीवन-स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है. भूजल में प्रदूषण के कारण पेयजल की उपलब्धता एक बड़ी समस्या रही है. कुछ समय पहले प्रकाशित यूनिसेफ के एक अध्ययन में रेखांकित किया गया है कि अभियान के चलते भूजल का स्तर बेहतर हुआ है तथा सतही जल के प्रदूषण में भी कमी आ रही है.

दो साल पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आकलन प्रस्तुत किया था कि खुले में शौच रूकने से तीन लाख से अधिक लोगों की जीवन रक्षा हुई है. कुछ महीने पहले विश्व बैंक ने एक रिपोर्ट में अन्य सकारात्मक परिणामों के साथ यह भी कहा गया है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना से वयस्कों के साथ बच्चों में भी साफ-सफाई के प्रति जागरूकता बढ़ी है. प्रधानमंत्री ने उचित ही कहा है कि कोरोना महामारी से बचाव में स्वच्छ भारत अभियान बहुत सहायक सिद्ध हुआ है क्योंकि कोविड-19 वायरस से बचाव ही उपाय है और इसके लिए हाथ-मूुंह धोते रहना और स्वच्छता का ध्यान रखना आवश्यक है.

जागरूकता के अभाव में लोगों को इसके लिए संक्रमण के प्रारंभ से ही प्रेरित करा पाना बहुत कठिन होता. इस अभियान के लिए समुचित वित्तीय आवंटन के साथ सरकार ने पेयजल, नदी सफाई, भू-क्षरण रोकने, प्लास्टिक का इस्तेमाल नियंत्रित करने, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने आदि के लिए भी कई योजनाओं का सूत्रपात किया है. इनके साझे असर से गरीबी और बीमारी पर काबू पाने का मजबूत आधार तैयार हुआ है. ये समस्याएं विकास और समृद्धि के लक्ष्य की ओर अग्रसर होने की राह में बड़ी बाधाएं है. हर नागरिक व समाज के हर वर्ग को गंदगी से पीछा छुड़ाने की इस बड़ी कवायद में शामिल होने की जरूरत है.

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