अर्थव्यवस्था का विस्तार

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अर्थव्यवस्था का विस्तार

सभी कारक इंगित कर रहे हैं कि प्रगति की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ती जायेगी और भारत आगामी आठ-दस वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेगा.

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एक ओर जहां बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि दर पर कई कारणों से ग्रहण लग रहा है, वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है. वैश्विक निवेशकों के भारत में बढ़ते भरोसे से अर्थव्यवस्था को ठोस आधार भी मिल रहा है. हाल ही में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की कुल बाजार पूंजी चार ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो चुकी है. हमारी अर्थव्यवस्था भी चार ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा छूने से कुछ ही दूर है. ऐसे में पूरे विश्वास से कहा जा सकता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था जल्दी ही पांच ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को हासिल कर लेगी. सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) के आधार पर भारत पांचवें पायदान पर पहले ही प���ुंच चुका है. वैश्विक निवेशक आम तौर पर अमेरिका, यूरोप, चीन और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करते हैं. वृद्धि के मामले में भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर है. निवेशकों के भारत में बढ़ते भरोसे का प्रमुख कारण राजनीतिक स्थिरता है. इससे नीतिगत स्थिरता बनी रहती है. दूसरा कारण आर्थिक सुधार हैं, जिनके कारण कारोबारी सुगमता आयी है तथा पारदर्शिता बढ़ी है. रिजर्व बैंक के रूप में हमारे पास एक मजबूत केंद्रीय बैंक है तथा बैंकिंग प्रणाली सुचारू रूप से चल रही है. यह तीसरी वजह है.

इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, कल्याणकारी योजनाओं तथा तकनीक पर ध्यान देने से खर्च में बढ़ोतरी स्वाभाविक है. इसके बावजूद सरकारी कर्ज जीडीपी का लगभग 82 प्रतिशत है, जबकि अनेक विकसित और विकासशील देशों में यह आंकड़ा सौ फीसदी से ज्यादा हो चुका है. सरकार ने देशी-विदेशी बाजार के लिए गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन से संबंधित प्रोत्साहन योजना का लाभ दिखने लगा है. इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पाद, इंजीनियरिंग, मशीनरी आदि के क्षेत्र में निर्यात में तेज बढ़ोतरी हो रही है. कोरोना काल में पैदा हुई स्थितियों, आपूर्ति शृंखला में अवरोध तथा भू-राजनीतिक आशंकाओं को देखते हुए कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां चीन के विकल्प तलाश रही हैं. इसका बड़ा फायदा भारत को मिला है. सभी कारक इंगित कर रहे हैं कि प्रगति की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ती जायेगी और भारत आगामी आठ-दस वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेगा. शेयर बाजार की पूंजी और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में वृद्धि एक सकारात्मक संकेत है. उल्लेखनीय है कि अच्छे मुनाफे के बावजूद उस अनुपात में घरेलू उद्योग निवेश नहीं कर रहे हैं. डिजिटल तकनीक तथा स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में प्रगति उत्साहजनक है, पर इसमें तेजी लाने की जरूरत है ताकि अर्थव्यवस्था को एक छलांग मिल सके.

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