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रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन

Updated at : 30 May 2025 11:06 AM (IST)
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रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन

वैश्विक उथल-पुथल के बीच रिकॉर्ड अनाज उत्पादन न सिर्फ भारत को जोखिम से मुक्त रखेगा, बल्कि इसके जरिये सबसे तेज गति से आर्थिक वृद्धि का सिलसिला भी जारी रहेगा. खाद्यान्न उत्पादन में लगातार वद्धि सिंचित क्षेत्रों में बढ़ोतरी और उन्नत बीजों के इस्तेमाल से ही संभव हो पायी है.

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केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 2024-25 फसल वर्ष के लिए कृषि उत्पादन का जो तीसरा अग्रिम अनुमान जारी किया है, उसके मुताबिक, इस अवधि में खाद्यान्न उत्पादन लगभग 6.5 फीसदी बढ़कर 3,539.59 लाख टन हो गया है. इसे अब तक की सर्वाधिक वृद्धि बतायी जा रही है. भारतीय कृषि के लिए यह बड़ी उपलब्धि है. केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, यह उपलब्धि किसानों की अथक मेहनत, कृषि वैज्ञानिकों की कुशलता, केंद्र सरकार की किसान हितैषी नातियों-योजनाओं और राज्य सरकारों के सहयोग से संभव हो सकी है. धान, गेहूं, मक्का, मूंगफली और सोयाबीन के रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान है. अग्रिम अनुमानों के मुताबिक, 2024-25 में धान उत्पादन 1,490.74 लाख टन (रिकॉर्ड), गेहूं उत्पादन 1,175.07 लाख टन (रिकॉर्ड) और मक्का उत्पादन 422.81 लाख टन (रिकॉर्ड) हुअा है. रिकॉर्ड धान उत्पादन के कारण इस वर्ष चीन को पछाड़ते हुए भारत के शीर्ष धान उत्पादक बनने की संभावना है. पोषक मोटे अनाजों का उत्पादन 621.40 लाख टन अनुमानित है, जो पिछले वर्ष से 52.04 लाख टन अधिक है. जबकि कुल दलहन उत्पादन में करीब 10 लाख टन की वृद्धि हुई है, हालांकि इनमें उड़द का उत्पादन घटा है.

तिलहन उत्पादन में 29.40 लाख टन की अनुमानित वृद्धि है. हालांकि रेपसीड-सरसों के उत्पादन में बीते वर्ष की तुलना में कमी आयी है. गन्ना उत्पादन में मामूली कमी दर्ज की गयी है, जबकि कपास के उत्पादन में लगातार दूसरे वर्ष कमी आयी है. खाद्य उत्पादन में वृद्धि अर्थव्यवस्था के लिए बहुत सकारात्मक है. इसलिए कि अपने यहां कृषि क्षेत्र अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रदर्शन में हमेशा ही बड़ी भूमिका निभाता रहा है. दूूसरे अधिक उत्पादन से खाद्य मुद्रास्फीति कम रहेगी, जो बहुत बड़ी राहत है. वैश्विक उथल-पुथल के बीच रिकॉर्ड अनाज उत्पादन न सिर्फ भारत को जोखिम से मुक्त रखेगा, बल्कि इसके जरिये सबसे तेज गति से आर्थिक वृद्धि का सिलसिला भी जारी रहेगा. खाद्यान्न उत्पादन में लगातार वद्धि सिंचित क्षेत्रों में बढ़ोतरी और उन्नत बीजों के इस्तेमाल से ही संभव हो पायी है. वर्ष 2024 में मानसून की वर्षा सामान्य से अधिक रही, जो खरीफ के साथ-साथ रबी की बुवाई में भी काफी लाभकारी रही. चूंकि इस वर्ष भी मानसून की वर्षा सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है, ऐसे में अगले फसल वर्ष में भी कृषि उत्पादन से स्वाभाविक ही बड़ी उम्मीद है.

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