अलग है मैनचेस्टर हमला

Updated at : 24 May 2017 6:16 AM (IST)
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अलग है मैनचेस्टर हमला

कमर आगा विदेश मामलों के जानकार qamar_agha@yahoo.com ब्रिटेन में यह फेस्टिवल सीजन है. वहां गरमी शुरू हो रही है और इसी समय में वहां म्यूजिकल और अन्य कई तरह के कल्चरल कंसर्ट होने शुरू हो जाते हैं. सोमवार रात जब ब्रिटेन के शहर मैनचेस्टर में एक पॉप कंसर्ट हो रहा था, उसके ठीक बाद वहां […]

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कमर आगा
विदेश मामलों के जानकार
qamar_agha@yahoo.com
ब्रिटेन में यह फेस्टिवल सीजन है. वहां गरमी शुरू हो रही है और इसी समय में वहां म्यूजिकल और अन्य कई तरह के कल्चरल कंसर्ट होने शुरू हो जाते हैं. सोमवार रात जब ब्रिटेन के शहर मैनचेस्टर में एक पॉप कंसर्ट हो रहा था, उसके ठीक बाद वहां एक तेज धमाका हुआ, जिसमें बाइस लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और कई घायल हुए. यह धमाका एक टार्गेट के तहत किया गया लगता है, जिसकी प्लानिंग बहुत पहले से की गयी होगी. भले ही एक आत्मघाती शख्स ने इस घटना को अंजाम दिया हो (वह भी मारा गया), लेकिन इसके पीछे बहुत सारे लोग हैं.
बहुत संभव है कि आतंकियों का वहां पर कोई स्लीपर सेल हो, जिसने दहशत फैलाने के मकसद से यह सब किया. यह सब अभी जांच का विषय है और ब्रिटेन की पुलिस इस घटना पर जब तक अपनी रिपोर्ट नहीं दे देती, तब तक सिर्फ यही मान कर चलना चाहिए कि निश्चित रूप से यह एक आतंकवादी घटना है. हालांकि, इस हमले को लेकर जिस तरह से सोशल मीडिया पर आइएस समर्थक खुशी जाहिर कर रहे थे, उससे इसमें कोई संदेह नहीं था कि आइएस ने इस हमले को अंजाम दिया है.
ऐसी घटनाओं के मद्देनजर, जहां तक आतंकियों के मंसूबों का सवाल है कि वे क्या चाहते हैं, तो मैं समझता हूं कि इस तरीके से उनका कोई भी मंसूबा पूरा नहीं होगा. बेगुनाह लोगों की जान लेकर कोई भी मकसद पूरा नहीं हो सकता, न तो उनकी कट्टर सोच को फायदा मिलना है और न ही उनसे यूरोप या दूसरे देशों की विदेश नीति बदलनेवाली है. जब-जब भी जहां-जहां भी ऐसे हमले होते हैं, तो ऐसे हमलों को अंजाम देनेवालों की कौम के मासूम लोगों को इसका दंश झेलना पड़ता है.
यूरोप में पहले भी कई आतंकी हमले हुए हैं. शार्ली एब्दो का वह हमला याद ही होगा. लेकिन, उन हमलों में कई हमलावर होते थे. इस ऐतबार से मैनचेस्टर का यह हमला एक अलग तरह के हमले का संकेत दे रहा है, क्योंकि इसे एक ही हमलावर ने अंजाम दिया. यह हमला रेकी, जगह के चुनाव और स्थानीय स्लीपर सेल के बिना संभव नहीं हो सकता, क्योंकि ब्रिटिश पुलिस का आतंकरोधी दस्ता फिलहाल सक्रिय है. मैनचेस्टर हमले जैसा ही इस साल मार्च में भी एक हमला ब्रिटिश संसद के बाहर हुआ था, जिसकी जिम्मेवारी आइएस ने ली थी.
तब एक हमलावर ब्रिटिश संसद के पास वेस्टमिंस्टर ब्रिज पर लोगों को कार से रौंदता चला गया और फिर उसने एक ब्रिटिश पुलिस अधिकारी को चाकू मारा. हालांकि, वह हमलावर मारा गया, लेकिन यह निशान तो छोड़ ही गया कि ब्रिटिश पुलिस के आतंकरोधी दस्ते को अब और भी चौकन्ना रहना होगा. दरअसल, ब्रिटेन एक ऐसा लोकतांत्रिक देश है, जहां ऐसे हमले करना आसान है, क्योंकि वहां पुलिस बंदोबस्त कम होती है और लोगों को कहीं भी घूमने की आजादी होती है. इसी आजादी का फायदा हमलावर उठाते हैं.
ब्रिटेन में अागामी आठ जून को चुनाव होने हैं और वहां इसकी तैयारी जोरों पर है. ऐसा माना जा रहा है कि इस चुनाव में बाधा डालने के लिए भी यह हमला किया गया हो. अगर इस खबर को सच मान लें, तो यह समझना आसान है कि ब्रिटेन में जो कट्टर समूह हैं, या नस्लीय आधारित संगठन हैं, इन सबको इस हमले से ज्यादा फायदा होगा. इसके बाद वहां नस्लीय भेदभाव भी बढ़ने की संभावना है.
एक बहुत महत्वपूर्ण बात यह है कि ब्रिटेन से तकरीबन दो हजार लोगों ने अरसा पहले सीरिया जाकर मिलिटेंट ट्रेनिंग ली थी. बाद में खबर आयी थी कि उन दो हजार लोगों में से कुछ सौ वापस ब्रिटेन आ गये थे. यहीं दूसरी बात यह है कि इस वक्त सीरिया और इराक में आइएस पर बहुत दबाव है, क्योंकि आइएस इन दोनों जगहों से भी कमजोर पड़ रहा है.
इराक के मोसुल से 90 प्रतिशत आइएस का खत्मा हो चुका है. अन्य जगाहों से भी आइएस का कब्जा खत्म होता जा रहा है, जिसके चलते वह दबाव में है और इसी दबाव के चलते दूसरे देशों में स्लीपर सेल के जरिये अपनी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के कोशिश कर रहा है. यह आइएस की बौखलाहट का नतीजा है, जो यूरोप में उभर कर सामने आ रहा है. दरअसल, पश्चिमी देशों- यूरोप और अमेरिका की सेनाएं इराक और सीरिया में हैं.
इस ऐतबार से आइएस के लिए यूरोप फिलहाल एक आसान टार्गेट है. आइएस ने पश्चिमी सेनाओं के साथ ही ईसाइयों के खिलाफ भी एक जंग छेड़ रखी है और इसी के तहत वह यूरोप में हमले करने की योजना बनाता रहता है. ईसाइयों और यहूदियों के खिलाफ जंग को आइएस जेहाद का नाम देता है, और इसीलिए वह हमले की फिराक में रहता है. यह जेहाद नहीं है. इससे न तो इसलाम का भला होनेवाला है, और न ही खुद आइएस वालों का. ऐसी गतिविधियां सिर्फ खुद को बदनामी और जिल्लत की जिंदगी ही देती हैं.
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