सशक्तीकरण की अच्छी पहल

Updated at : 17 Apr 2017 6:10 AM (IST)
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सशक्तीकरण की अच्छी पहल

लैंगिक असमानता के लिहाज से भारत दुनिया के पिछड़े देशों में शुमार होता है. वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक महिलाओं की साक्षरता दर 65.66 फीसदी है, जबकि पुरुषों में यह दर 82.14 फीसदी है. निरंतर आर्थिक विकास के बावजूद श्रम-शक्ति में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है. नेशनल सैंपल सर्वे के आंकड़े बताते हैं […]

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लैंगिक असमानता के लिहाज से भारत दुनिया के पिछड़े देशों में शुमार होता है. वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक महिलाओं की साक्षरता दर 65.66 फीसदी है, जबकि पुरुषों में यह दर 82.14 फीसदी है. निरंतर आर्थिक विकास के बावजूद श्रम-शक्ति में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है. नेशनल सैंपल सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि 1987 से 2011 के बीच शहरी क्षेत्रों में यह हिस्सेदारी 26-28 फीसदी के स्तर पर स्थिर बनी हुई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 57 से घटकर 44 फीसदी हो गयी है. राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वे की हालिया रिपोर्ट बताती है कि जिन क्षेत्रों में महिलाओं की शैक्षणिक स्थिति बेहतर है, वहां बच्चों का स्वास्थ्य भी अच्छा है.

यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि शिशु दर और कुपोषण के मामले में भारत वैश्विक स्तर पर निचले पायदान पर खड़ा है. ऐसे परिदृश्य में उच्च शिक्षा और अच्छी नौकरियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के विज्ञान एवं तकनीक विभाग ने दो हजार करोड़ रुपये के एक शुरुआती कार्यक्रम की घोषणा की है. इसके तहत महिलाओं को इस क्षेत्र में नौकरियां करने के लिए प्रोत्साहन दिया जायेगा. यदि विकसित देशों के साथ तुलना करें, तो वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग शिक्षा में महिलाओं के नामांकन की दर 35 फीसदी के करीब है, पर इस क्षेत्र में नौकरियों में उनका हिस्सा मात्र 12 फीसदी है. ‘विज्ञान ज्योति’ नामक इस कार्यक्रम के अंतर्गत शैक्षणिक संस्थाओं और प्रयोगशालाओं में अस्थायी नियुक्तियों की योजना है.

आम तौर पर देखा जाता है कि मेडिकल शिक्षा प्राप्त महिलाएं संबंधित रोजगार को नहीं छोड़ती हैं, पर इंजीनियरिंग में यह अक्सर होता है. इंजीनियरिंग में अभी नामांकन में महिलाओं का हिस्सा 28 फीसदी है तथा मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल व केमिकल जैसे विभागों में यह और भी कम है. इस कमी को कुछ हद तक पाटने की कोशिश में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आइआइटी) सस्थानों ने अगले साल से 1400 से अधिक लड़कियों को प्रवेश देने का निर्णय लिया है.

लड़कियों का कोटा बढ़ाने की यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी, जब तक कि उनकी हिस्सेदारी 20 फीसदी के स्तर तक न पहुंच जाये. देश के 23 आइआइटी संस्थानों में अभी यह महज आठ फीसदी ही है. अभिभावकों और छात्राओं को इन पहलों का लाभ उठाने के लिए आगे आना चाहिए. सीटें बढ़ाने का यह फैसला अन्य संस्थाओं के लिए भी अनुकरणीय है. उम्मीद है कि इन प्रयासों से शैक्षणिक और रोजगार असमानता को कम करने में काफी मदद मिलेगी तथा ऐसी कोशिशों को अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने की पहल होगी

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