उपचुनाव के संदेश

Updated at : 14 Apr 2017 5:39 AM (IST)
विज्ञापन
उपचुनाव के संदेश

आम तौर पर उपचुनावों के नतीजे चौंकानेवाले नहीं होते, और अक्सर सत्तारूढ़ पाले में जीत दर्ज होती है. इस बार भी कमोबेश ऐसा ही है. परंतु, मौजूदा राजनीतिक तापमान के मद्देनजर इन नतीजों का महत्व बढ़ जाता है, क्योंकि आठ राज्यों की दस विधानसभा सीटों पर हार-जीत में आगे के संकेत पढ़े जा सकते हैं […]

विज्ञापन
आम तौर पर उपचुनावों के नतीजे चौंकानेवाले नहीं होते, और अक्सर सत्तारूढ़ पाले में जीत दर्ज होती है. इस बार भी कमोबेश ऐसा ही है. परंतु, मौजूदा राजनीतिक तापमान के मद्देनजर इन नतीजों का महत्व बढ़ जाता है, क्योंकि आठ राज्यों की दस विधानसभा सीटों पर हार-जीत में आगे के संकेत पढ़े जा सकते हैं या निकट भविष्य में होनेवाले चुनावों के बारे में कुछ अनुमान लगाया जा सकता है. मध्य प्रदेश, राजस्थान और असम में भाजपा सत्ता में है तथा उसे वहां जीत मिली है. इसका अर्थ है कि उसकी पकड़ बरकरार है.
हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत में चुनाव होंगे. वहां अपनी सीट को बरकरार रख भाजपा ने अपनी बढ़त की घोषणा कर दी है, पर कर्नाटक में उसे दोनों सीटों पर कांग्रेस से मात मिली है. अगले साल मई में इस राज्य में विधानसभा चुनाव होनेवाले हैं. हालांकि, उसके बारे में अभी से कयास लगाना उचित नहीं होगा, पर यह कहा जा सकता है कि सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी भाजपा को रोकने के लिए पूरा दम दिखा रही है. हाल के दिनों में कुछ दिग्गज कांग्रेसियों के भाजपा में जाने के बावजूद तथा दक्षिण भारत में पैर पसारने की जुगत में लगी पार्टी के लिए यह हार शुभ नहीं है. बंगाल में उसे बहुत अच्छे वोट मिले हैं. यह तृणमूल कांग्रेस और भाकपा के लिए चिंताजनक खबर है. यहां माकपा को बड़े अंतर से तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा है. झारखंड में मुख्य विपक्षी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा की जीत राज्य की भाजपा सरकार के लिए चिंताजनक है. अब दिल्ली का रुख करें.
अति आत्मविश्वास से ग्रस्त आम आदमी पार्टी राजौरी गार्डन सीट पर तीसरे स्थान पर रही है और करीब 14 फीसदी वोट के साथ उसके उम्मीदवार की जमानत भी जब्त हो गयी है. भाजपा ने यह सीट छीनी है. दिल्ली में 2013 से लगातार हाशिये पर जाती कांग्रेस अच्छे मतों के साथ दूसरे स्थान पर रही है. जानकारों की मानें, तो इसी महीने शहर के तीन नगर निगमों के चुनाव से पहले सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के लिए यह बड़ा झटका है तथा कांग्रेस के पास अपनी खोयी हुई जमीन हासिल करने का रास्ता खुला है.
पंजाब के हालिया चुनाव में मन-मुताबिक कामयाबी नहीं मिलने के बाद दिल्ली की यह करारी हार अरविंद केजरीवाल की कार्यशैली पर भी एक टिप्पणी है. कुल मिला कर, ये परिणाम भाजपा के लिए बहुत उत्साहजनक, कांग्रेस के लिए संतोषप्रद तथा आम आदमी पार्टी के लिए बेहद निराशापूर्ण हैं. कारणों की विवेचना तो होती रहेगी, पर यह तो राजनीतिक दलों को समझ ही लेना चाहिए कि मतदाता के मिजाज को पलटते देर नहीं लगती.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola