हाइवे पर प्रगति अधूरी

Updated at : 06 Apr 2017 5:52 AM (IST)
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हाइवे पर प्रगति अधूरी

बेशक यह गर्व करने लायक है कि सड़क नेटवर्क के विस्तार के मामले में भारत दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर आ पहुंचा है. अमेरिकी सड़कों की कुल लंबाई 60.58 लाख किलोमीटर है. वर्ष 2012 तक 40.24 लाख किलोमीटर सड़कों के साथ चीन दूसरे स्थान पर था, पर अब भारत में सड़कों की […]

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बेशक यह गर्व करने लायक है कि सड़क नेटवर्क के विस्तार के मामले में भारत दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर आ पहुंचा है. अमेरिकी सड़कों की कुल लंबाई 60.58 लाख किलोमीटर है. वर्ष 2012 तक 40.24 लाख किलोमीटर सड़कों के साथ चीन दूसरे स्थान पर था, पर अब भारत में सड़कों की कुल लंबाई 40.70 लाख किलोमीटर हो चुकी है. जाहिर है, हाल के वर्षों में सड़क निर्माण के काम को प्राथमिकता मिली है और निर्माण-कार्य में तेजी आयी है.
बात चाहे आॅटो-मोबाइल उद्योग को गति देने की हो, या फिर देश के बाजारों और औद्योगिक ठिकानों को आपस में जोड़ने तथा उनके बीच यातायात को सुगम बनाने की हो, या फिर ग्रामीण क्षेत्रों को नये उभरते बाजारों से जोड़ने की हो-भारत जैसे देश के लिए सड़कों का विस्तार अत्यंत महत्वपूर्ण है. देश की माल ढुलाई का 60 फीसदी और यात्रियों के रोजाना के आवागमन का 85 फीसदी फिलहाल सड़कों के जरिये ही होता है. ऐसे में अगर सड़कों के निर्माण के काम में देरी होती है, तो यह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है. अफसोस की बात है कि 2016-17 के पहले नौ महीनों के दौरान उच्चपथ (हाइवे) के निर्माण निर्धारित लक्ष्य का 30 फीसदी ही पूरा हो सका है.
संबद्ध मंत्रालय ने प्रतिदिन 41 किलोमीटर सड़क-निर्माण का लक्ष्य तय किया था, लेकिन नये आंकड़े बताते हैं कि प्रतिदिन कुल 17 किलोमीटर की लंबाई में ही सड़कों (उच्चपथ) का निर्माण हुआ है. इस धीमी गति की एक बड़ी वजह इस क्षेत्र में अपेक्षा से कम निजी निवेश होना है. सरकार अपने खर्चे पर उच्चपथ के निर्माण पर बहुत जोर दे, तब भी 25 हजार किलोमीटर सड़क बनाने के लक्ष्य को पूरा नहीं किया जा सकेगा.
अर्थव्यवस्था की मौजूदा जरूरतों को देखते हुए यह स्थिति निराशाजनक है. दक्षिण एशियाई क्षेत्र में भारत की व्यावसायिक संभावनाओं को बढ़ाने के लिए इस पर ध्यान देना होगा. बीते साल सितंबर महीने में बांग्लादेश, नेपाल और भूटान के साथ आवाजाही बढ़ाने के उद्देश्य से भारत ने 1.04 बिलियन डॉलर लागत वाली एक सड़क परियोजना को मंजूरी दी थी. पर, उच्चपथ के निर्माण का निर्धारित लक्ष्य पूरा न होने से ऐसी परियोजनाओं का भविष्य भी अधर में लटक जाता है.
उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार निर्माण-कार्य में आनेवाले अवरोधों के वास्तविक आकलन के आधार पर कोई कारगर योजना बनायेगी, ताकि देश के विभिन्न अंचलों और पड़ोसी देशों से होनेवाले यातायात को सस्ता, सुगम और व्यावसायिक हितों के अनुकूल बनाया जा सके.
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