!!आशुतोष चतुर्वेदी, प्रधान संपादक, प्रभात खबर!!
आजादी से पहले जब देश में राजा रजवाड़ों का दौर था, वे जो गलत-सही कहते थे, वह पत्थर की लकीर होती थी. आजादी मिली और सांसद और विधायक जनप्रतिनिधि के रूप में चुन कर आने लगे. उम्मीद की गयी थी कि जनप्रतिनिधि अनुकरणीय आचरण पेश करेंगे.
आजादी के बाद ऐसा दिखा भी लेकिन दिनोंदिन सांसदों, विधायकों के आचरण में गिरावट नजर आने लगी है और अब वे नये दौर के महाराजा के रूप में उभरकर सामने आ रहे हैं. स्पष्ट कर दूं कि सभी सांसद ऐसे नहीं हैं. लेकिन ऐसे सांसदों की बड़ी संख्या है जिनका आचरण आये दिन किसी गलत कारण से सुर्खियों में रहता है. चिंता की बात यह है कि पार्टी नेतृत्व ऐसे नेताओं के आचरण के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता. यही वजह है कि ऐसी घटनाओं का सिलसिला जारी रहता है.
ऐसे ही एक जनप्रतिनिधि हैं शिव सेना के सांसद रवींद्र गायकवाड़. इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एयर इंडिया के अधिकारी सुकुमार की चप्पल से पिटाई के बाद से वह सुर्खियों में हैं. उनकी कारगुजारी ने जनप्रतिनिधियों के आचार-व्यवहार पर सवाल खड़े कर दिये हैं.
उनके पास एयर इंडिया की यात्रा करने के लिए बिजनेस क्लास का कूपन था. लेकिन, पुणे से दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के जिस विमान से वे यात्रा करना चाह रहे थे, उसमें इकोनॉमी क्लास ही था.
उन्होंने जिद की कि उन्हें आगे की सीट दी जाए और उन्हें वह दी भी गयी. लेकिन वह इतने से संतुष्ट नहीं हुए. उनका मानना था कि उन्हें आम लोगों के साथ बिठा दिया गया जबकि वे तो सांसद हैं, खास हैं. दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचे तो उन्होंने विमान से उतरने से मना कर दिया और मनाने आये एयर इंडिया के ड्यूटी मैनेजर की पिटाई कर दी. गायकवाड़ ने इस पर कोई अफसोस जताने के बजाए गर्व से मीडिया से कहा कि उन्होंने उस अधिकारी को पच्चीस बार चप्पलों से पीटा है. साथ ही दिल्ली पुलिस को चुनौती दी कि उसमें दम है तो गिरफ्तार करके दिखाए. गायकवाड़ की यह पहली हरकत नहीं है, उन पर सात आपराधिक मामले पहले से ही दर्ज हैं. हालांकि एयर इंडिया और फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने गायकवाड़ की एंट्री पर रोक लगा दी है, जिसके कारण वह एयर इंडिया के अलावा किसी भी निजी एयरलाइंस से भी यात्रा नहीं कर सकते हैं. कानून को अपने हाथ में लेकर व्यवस्था को खुली चुनौती देने के बाद भी अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
मुझे बीबीसी में काम करने और इस दौरान ब्रिटेन मे रहने और वहां के लोकतंत्रिक प्रणाली को नजदीक से देखने का अवसर मिला है. हमारे वरिष्ठ साथी और हिंदी सेवा के संपादक रहे शिवकांत जी ने ब्रिटेन का यह वाकया सुनाया जो खासा सुर्खियों में रहा था. ब्रिटेन में कैमरन सरकार थी और कंजरवेटिव पार्टी के मुख्य सचेतक सांसद एंड्यू मिचेल थे.
वे प्रधानमंत्री निवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट से बैठक कर साइकिल से निकले. निकलने के दो गेट हैं-एक बड़ा और दूसरा छोटा. बड़े गेट कार आदि के लिए है और छोटा पैदल निकलने वालों के लिए. छोटे गेट के ऊपर जाली है इसलिए वहां से निकलने के लिए एंड्रयू मिचेल को साइकिल से उतरना पड़ा. सुरक्षाकर्मी ने बड़ा गेट नहीं खोला. इस पर नाराज होकर उन्होंने सुरक्षा गार्ड को ‘प्लेब’ यानी छोटे तबके का आदमी कह दिया. इसकी शिकायत सुरक्षाकर्मी ने अधिकारियों से की और इस पर इतना हंगामा मचा कि एंड्रयू मिचेल को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.
दूसरा वाकया है, जब टोनी ब्लेयर प्रधानमंत्री थे तो उनके 17 वर्षीय बेटे ने दोस्तों के साथ शराब पीकर सार्वजिनक जगह हंगामा किया. पुलिस पकड़ कर थाने ले गयी. चूंकि लड़का नाबालिग था इसलिए पुलिस अधिकारी को ये अधिकार था कि वह चाहे तो मां-बाप को तलब करे और वैधानिक चेतावनी देकर छोड़े. पुलिस ऑफिसर ने प्रधानमंत्री ब्लेयर दंपती को तलब किया और प्रधानमंत्री की पत्नी शेरी ब्लेयर को पुलिस थाने जाना पड़ा, तब जाकर बेटा छूटा. यह है लोकतंत्र और व्यवस्था की ताकत का नमूना. हमारे देश में मंत्री, सांसद को तो छोड़िए किसी पार्षद के बेटे को तो हाथ लगाकर देखिए, वह व्यवस्था की कैसी धज्जियां उड़ा देता है.
तुर्रा यह कि शिव सेना अपने सांसद पर नकेल डालने के बजाए उसने एयर इंडिया के अधिकारी के खिलाफ संसद में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश कर दिया है. उनकी दलील है कि एयर इंडिया के अधिकारी ने एक सांसद के साथ बदसलूकी की. अब यह मामला संसद की विशेषाधिकार समिति के समक्ष जायेगा. दूसरी ओर समाजवादी पार्टी से राज्यसभा में उन्हें समर्थन भी मिल गया. समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल ने बैन को एयरलाइन कंपनियों की दादागीरी करार दिया. 2014 में महाराष्ट्र सदन में 11 सांसदों ने अरशद जुबैर नाम के मुसलिम कर्मचारी के मुंह में रोटी ठूंसने का मामला भी सुर्खियों में आया था, जबकि उन्हें मालूम था कि वो उस वक्त रोजे पर था.
लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के पक्ष में काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म (एडीआर) के अनुसार शिव सेना के 18 में से 15 सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. कुल 186 सांसदों यानी 34 फीसदी सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें सबसे बड़ी संख्या महाराष्ट्र, यूपी और बिहार के सांसदों की है. पिछली लोक सभा में 30 फीसदी सांसदों पर आपराधिक मामले थे और उसके पहले 24 फीसदी पर मामले दर्ज थे यानी लगातार आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सांसदों की संख्या बढ़ी है.
साथ ही साहब के जूते पकड़े, उन्हें पहनाते नौकरशाहों की तसवीरें भी आम होती जा रही हैं. जब तक व्यवस्था को काम करने की आजादी और उसे ताकत हस्तांतरित नहीं की जायेगी, उसे अपने जूते की नोक के नीचे रखा जायेगा, तब तक लोकतंत्र और देश का भला नहीं होने वाला.
