शराबबंदी पर उचित फैसला
Updated at : 03 Apr 2017 5:53 AM (IST)
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सर्वोच्च न्यायालय ने राजमार्गों पर शराब की बिक्री पर रोक लगाने के अपने पूर्ववर्ती आदेश पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि यह आदेश न सिर्फ शराब की दुकानों पर लागू होगा, बल्कि राजमार्गों पर स्थित बार, होटल और रेस्तराँ भी शराब नहीं परोस सकेंगे. जैसा कि फैसले में कहा गया है, महज दुकानों […]
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सर्वोच्च न्यायालय ने राजमार्गों पर शराब की बिक्री पर रोक लगाने के अपने पूर्ववर्ती आदेश पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि यह आदेश न सिर्फ शराब की दुकानों पर लागू होगा, बल्कि राजमार्गों पर स्थित बार, होटल और रेस्तराँ भी शराब नहीं परोस सकेंगे. जैसा कि फैसले में कहा गया है, महज दुकानों को बंद कर देने से रोक का औचित्य पूरा नहीं होता है.
राजमार्गों पर दुर्घटनाओं और अपराधों में शराब एक अहम कारक है. उम्मीद की जानी चाहिए कि अदालत के स्पष्टीकरण के बाद राजमार्ग अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित हो सकेंगे. शराबबंदी जैसी पहलों के सामने हमेशा यह चुनौती होती है कि चोरी-छिपे शराब की खरीद-बिक्री और उपभोग पर अंकुश कैसे लगे. यह भी देखा गया है कि ऐसे मामलों में कठोर कानूनी तंत्र की तुलना में संतुलित और क्रमिक नियमन अधिक कारगर साबित होते हैं. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ताजा निर्देश में इस पहलू का ध्यान रखा है.
पिछले दिसंबर के आदेश में कहा गया था कि राजमार्गों से 500 मीटर की दूरी में शराब नहीं बेची जा सकेगी. इसमें कुछ राहत देते हुए नये निर्देश में 20 हजार और इससे कम आबादी के नगरों, शहरों तथा नगरपालिका क्षेत्रों के लिए राजमार्ग से दूरी की सीमा घटाकर 220 मीटर कर दी गयी है. विशिष्ट भौगोलिक स्थिति को देखते हुए मेघालय और सिक्किम को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है. बहरहाल, शराब के नकारात्मक असर को कमतर करने की दिशा में यह आदेश एक बड़ा कदम है और इससे एक बड़े इलाके में सीमित शराबबंदी का रास्ता खुला है.
बिहार में नीतीश सरकार द्वारा पूर्ण शराबबंदी की घोषणा के बाद अनेक राज्यों में इस संबंध में कोशिशें की जा रही हैं तथा एक माहौल तैयार हुआ है कि शराब के चंगुल से समाज को बचाया जा सकता है और ऐसा प्रयास निरंतर जारी रहना चाहिए. लेकिन यह हमें हमेशा ध्यान में रखना होगा कि समाज में गहरे बसी समस्याओं से निजात पाने के लिए सिर्फ कानूनी या प्रशासनिक पहलें ही काफी नहीं होतीं. अदालतें और सरकारें एक सीमा तक ही कानूनी प्रावधानों को लागू करा सकती हैं.
लेकिन समाज और नागरिकों की जागरूकता तथा सकारात्मक प्रयास से ही ये प्रावधान सफल हो सकते हैं. शराब पीनेवाले के तन-मन-धन के विनाश का कारण तो बनती ही है, वह उसके परिवार के भविष्य को भी अंधेरे में धकेलती है. साथ ही, आस-पड़ोस, समाज और अंततः देश को भी दुष्परिणामों को भुगतना पड़ता है. ऐसे में सरकार और न्यायालय के साथ हम नागरिकों को भी शराब पर अंकुश लगाने की कोशिशों में पूरा योगदान देना चाहिए.
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