जातिवाद एक अभिशाप
Updated at : 28 Dec 2016 1:01 AM (IST)
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पिछले दिनों लातेहार जिले में एक दलित की हत्या हो जाती है. वहां का जातीय समाज के तुगलकी फरमान द्वारा दलित की शवयात्रा सहित कफन देने से गांव के सभी लोगों को रोका जाता है. यहां तक कि नाई और पंडित, जो कि हिंदू रीति रिवाज के अनुसार जरूरी होते हैं, उसे भी जाने नहीं […]
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पिछले दिनों लातेहार जिले में एक दलित की हत्या हो जाती है. वहां का जातीय समाज के तुगलकी फरमान द्वारा दलित की शवयात्रा सहित कफन देने से गांव के सभी लोगों को रोका जाता है. यहां तक कि नाई और पंडित, जो कि हिंदू रीति रिवाज के अनुसार जरूरी होते हैं, उसे भी जाने नहीं दिया जाता है.
जब दलित परिवार के लोगों ने दूसरे गांव से नाई और पंडित बुलाया, तो उन्हें भी डरा धमकाकर भगा दिया. अगर हम सभी भारतीय चाहते हैं कि भारत एक शक्तिशाली देश बने, तो कैशलेस से पहले हमें कास्टलेस (जातिहीन) समाज की जरूरत है जिससे कि हमारा देश आंतरिक रूप से मजबूत रहे.
अजय पटेल, इमेल से
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