अग्नि की उड़ान

Updated at : 27 Dec 2016 6:49 AM (IST)
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अग्नि की उड़ान

पूरब में पूरे चीन और पश्चिम में इटली तक की दूरी चंद मिनटों में तय करनेवाले अंतरमहाद्वीपीय प्रक्षेपास्त्र अग्नि-5 के सफल परीक्षण से रक्षा-प्रौद्योगिकी के मामले में भारत की महारत का झंडा फिर बुलंद हुआ है. अग्नि मिसाइल की सफलता का यह पांचवां चरण है. सात सौ से लेकर 3,500 किलोमीटर तक सटीक निशाना साधनेवाले […]

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पूरब में पूरे चीन और पश्चिम में इटली तक की दूरी चंद मिनटों में तय करनेवाले अंतरमहाद्वीपीय प्रक्षेपास्त्र अग्नि-5 के सफल परीक्षण से रक्षा-प्रौद्योगिकी के मामले में भारत की महारत का झंडा फिर बुलंद हुआ है. अग्नि मिसाइल की सफलता का यह पांचवां चरण है. सात सौ से लेकर 3,500 किलोमीटर तक सटीक निशाना साधनेवाले अग्नि मिसाइल के चार चरणों में भारत पहले ही सफलता हासिल कर चुका है. पचासी फीसदी स्वदेशी तकनीक से बनी अग्नि-5 की सफलता के साथ भारत 5,000 किलोमीटर की दूरी की मारक-क्षमता के मिसाइलों से लैस अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन जैसे देशों की कतार में शामिल हो गया है.
कई एटमी वारहेड से लैस इस प्रक्षेपास्त्र के जरिये पूरे एशिया, अफ्रीका और आधे यूरोप में कहीं भी निशाना साधा जा सकता है. यह विश्व की अग्रणी सैन्यशक्ति के रूप में उभरते ताकतवर भारत का सूचक है. सबसोनिक क्रूज मिसाइल ‘निर्भय’ की हालिया असफलता के संदर्भ में भी अग्नि-5 के परीक्षण की सफलता हमारे रक्षा वैज्ञानिकों के लिए खास मायने रखती है. महज हफ्ता भर पहले खबर आयी थी कि मारक-क्षमता में अमेरिका के टॉमहॉक और पाकिस्तान के बाबर मिसाइल के समतुल्य स्वदेशी तकनीक से बना ‘निर्भय’ परीक्षण के दौरान अपने प्रक्षेप-पथ से भटक गया. ‘निर्भय’ के परीक्षण की यह चौथी असफलता थी.
अग्नि-5 की सफलता ने इस अफसोस को धो दिया है और साथ ही, परंपरागत प्रतिस्पर्धी पाकिस्तान पर फिलहाल भारत को बढ़त हासिल हो गयी है. पाकिस्तान अभी 2,750 किलोमीटर की दूरी तक मार करनेवाला शाहीन-3 मिसाइल ही बना पाया है, जिसके बूते पाकिस्तानी सेना कई तरह की गर्वोक्तियां करते रहती है, जिसमें एक यह भी है कि पाकिस्तानी सेनाभारत सहित म्यांमार, इजरायल कजाकिस्तान तक कहीं भी एटमी वारहेड से हमला कर सकती है.
पाकिस्तान फिलहाल तैमूर अंतर्द्वीपीय मिसाइल बनाने की दिशा में अग्रसर है. रक्षा-विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान के ‘तैमूर’ मिसाइल बनाने में सफल रहने पर अग्नि-5 की बराबरी की उम्मीद पाल सकता है. लेकिन, तब तक भारत आठ हजार से 10 हजार किलोमीटर की दूरी तक मार करनेवाला अग्नि-6 बना चुका होगा. दक्षिण एशियाई क्षेत्र विश्व की सैन्य महाशक्तियों का रणनीतिक अखाड़ा है.
चीन, रूस और अमेरिका के आर्थिक-सामरिक हितों की प्रतिस्पर्धा के बीच दक्षिण एशियाई क्षेत्र में भारत के लिए अपनी स्थिति मजबूत बनाये रखने के लिए सैन्य-शक्ति, विशेषकर विभिन्न किस्म की मिसाइलों की तकनीक, के मामले में बढ़त और आत्मनिर्भरता बनाये रखना जरूरी है. अग्नि-5 की सफलता इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है.
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