भारत में इसलामिक स्टेट

Updated at : 26 Dec 2016 6:03 AM (IST)
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भारत में इसलामिक स्टेट

भारत दशकों से अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का निशाना रहा है. दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कहर ढा रहे इसलामिक स्टेट की नापाक नजर भी भारत पर है. बीते नवंबर के आखिरी हफ्ते में सरकार ने संसद को जानकारी दी थी कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) और राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक इसलामिक स्टेट के […]

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भारत दशकों से अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का निशाना रहा है. दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कहर ढा रहे इसलामिक स्टेट की नापाक नजर भी भारत पर है. बीते नवंबर के आखिरी हफ्ते में सरकार ने संसद को जानकारी दी थी कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) और राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक इसलामिक स्टेट के 68 समर्थकों को गिरफ्तार किया है.
पहले से सक्रिय आतंकी और चरमपंथी गिरोहों की मौजूदगी से भी इसलामिक स्टेट फायदा उठाने की फिराक में है. एक रिपोर्ट के मुताबिक एनआइए ने हैदराबाद से चलाये जा रहे इसलामिक स्टेट से संबद्ध समूह का पता लगाया है जिसका उद्देश्य दक्षिण भारत में प्रभाव-क्षेत्र बनाना था. ऐसे कई मामले भी सामने आ चुके हैं जिनमें भारतीय युवाओं ने इराक और सीरिया का रुख किया था. हैदराबाद के इस गिरोह के पर्दाफाश से यह भी पता चलता है कि अल-बगदादी और उसके करीबी अतिवादी धार्मिक विचारधाराओं से गुमराह भारतीय युवाओं का इस्तेमाल देश के भीतर ही करना चाहता हैं.
कुछ समय पहले एक कथित वीडियो में इसलामिक स्टेट ने भारत को तबाह करने की धमकी भी दी थी. सरकारों और सुरक्षा तंत्र को इस खतरे की भयावहता को ठीक से समझ कर उसे रोकने की पूरी कोशिश करनी होगी. भारत के पड़ोसी देशों- पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान- में इसलामिक स्टेट का असर बढ़ रहा है. भारत को अस्थिर करने की ताक में रहनेवाली ताकतें भी इसलामिक स्टेट से गठजोड़ कर सकती हैं.
हिरासत में लिए गये कथित आतंकी विभिन्न राज्यों से हैं. इसका मतलब यह है कि प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से मानवता को बर्बाद करने पर तुले बगदादी के विचार अलग-अलग हिस्सों में पहुंच रहे हैं. एनआइए की हालिया जांच से संकेत मिलता है कि गिरोह के सदस्य नयी तकनीकों के इस्तेमाल मे सक्षम हैं. गिरफ्तार युवाओं में अधिकतर पढ़े-लिखे हैं.
ऐसे में इस चुनौती से निपटने के लिए अनेक स्तरों पर पहल की जरूरत है. गुमराह युवाओं को मुख्यधारा में लाने, कट्टर लोगों को पकड़ने, सुरक्षा और निगरानी तंत्रों को मजबूत बनाने, समाज को सतर्क एवं संवेदनशील बनाने तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सहयोग को बढ़ावा देने जैसे उपायों पर ध्यान देना चाहिए.
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