राहत की उम्मीद
Updated at : 18 Nov 2016 6:47 AM (IST)
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नोटबंदी से हो रही परेशानियों को कम करने के लिए सरकार ने कुछ और उपायों की घोषणा की है. कृषि बाजार समितियों के कारोबारियों की हर सप्ताह निकासी की सीमा को 50 हजार कर दिया गया है. इससे किसानों को भुगतान करने में मदद मिलेगी, जिन्हें खेती के लिए नकदी की सख्त जरूरत है. किसान […]
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नोटबंदी से हो रही परेशानियों को कम करने के लिए सरकार ने कुछ और उपायों की घोषणा की है. कृषि बाजार समितियों के कारोबारियों की हर सप्ताह निकासी की सीमा को 50 हजार कर दिया गया है. इससे किसानों को भुगतान करने में मदद मिलेगी, जिन्हें खेती के लिए नकदी की सख्त जरूरत है. किसान भी अपने खाते से 25 हजार रुपये हर सप्ताह निकाल सकते हैं.
देश के कई इलाकों में शादियों का मौसम है तथा नकदी की कमी और नोटबंदी से विवाह की तैयारियों पर सीधा असर पड़ा है. सरकार ने इन शिकायतों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए दुल्हा या दुल्हन के परिवारों में से एक खाते से ढाई लाख रुपये निकालने की अनुमति दी है. हालांकि, यह रकम नाकाफी है, पर इससे बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा. केंद्र सरकार और अधीनस्थ उपक्रमों के निचले स्तर के कर्मचारी अपने वेतन से 10 हजार की नकद राशि की अग्रिम निकासी कर सकते हैं.
मोबाइल एटीएम चलाने, निकासी की सीमा बढ़ाने तथा 24 नवंबर तक अस्पतालों और सार्वजनिक सेवाओं के लिए पुराने नोटों से भुगतान जैसे उपायों के बाद अब नयी घोषणाओं से उम्मीद है कि लोगों की मुश्किल कुछ हद तक कम होगी. गुरुवार शाम से 22,500 एटीएम से पांच सौ और दो हजार के नये नोटों की निकासी भी नकदी संकट से निजात दिलाने में सहायक होगी. सरकार ने भरोसा दिलाया है कि एक सप्ताह के भीतर दो लाख एटीएम से नये नोटों की निकासी संभव होगी. आशा है कि तब निकासी की सीमा भी बढ़ायी जा सकेगी. नकदी की उपलब्धता के लिए पुराने नोटों को बदलने की सीमा 4,500 से घटा कर 2,000 रुपये कर दी गयी है. इससे बैंकों में भीड़ बढ़ सकती है. अनुमान है कि स्थिति बेहतर होने पर इसमें ढील दे जायेगी. छोटे नोटों की आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास भी तेजी से किये जा रहे हैं. मोबाइल एटीएम और कई जगह बैंकों द्वारा छोटे नोट दिये जा रहे हैं. लेकिन, यह संतोषजनक नहीं है.
छोटे नोट रोजमर्रा के लेन-देन के साथ बड़े नोटों से की गयी खरीदारी में शेष राशि लौटाने के लिए भी जरूरी हैं. सरकार और बैंकों को इस पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है, ताकि निम्न आय वर्ग और छोटे दुकानदारों को सहूलियत हो, क्योंकि ऐसे समूह कार्डों से या अधिक राशि का लेन-देन नहीं करते हैं. इन पर नोटबंदी का सबसे अधिक असर भी पड़ा है. कुल मिला कर उम्मीद बनती है कि आनेवाले दिनों में मौजूदा अफरातफरी में कमी आयेगी, लेकिन इस मुश्किल वक्त में सरकार और बैंकों को आम लोगों के सकारात्मक सहयोग की जरूरत भी है.
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