पहाडि़या राज के धरोहरों को बचायें
Updated at : 17 Nov 2016 6:13 AM (IST)
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अति प्राचीन काल से वर्तमान संथाल परगना के धरती पर पहाड़िया राजा यहां होने का प्रमाण पांच हजार वर्षों से भी अधिक पुराना इतिहास है़ चीनी यात्री ह्वेनसांग एवं फाहियान के यात्रा वृतांत में पहाड़िया राजाओं के संघर्ष का वर्णन मिलता है़ मुगल काल में हंडवा, गिद्धौर, लकड़ागढ़, सकरूगढ़, तेलियागढ़ी, महेशपुर राज, पाकुड़ राज एवं […]
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अति प्राचीन काल से वर्तमान संथाल परगना के धरती पर पहाड़िया राजा यहां होने का प्रमाण पांच हजार वर्षों से भी अधिक पुराना इतिहास है़ चीनी यात्री ह्वेनसांग एवं फाहियान के यात्रा वृतांत में पहाड़िया राजाओं के संघर्ष का वर्णन मिलता है़ मुगल काल में हंडवा, गिद्धौर, लकड़ागढ़, सकरूगढ़, तेलियागढ़ी, महेशपुर राज, पाकुड़ राज एवं सनकारा राज वर्तमान (गांदो) के राज धरोहर का प्रमाण आज भी जीवित है़
पहाड़िया राजा के ऐतिहासिक धरोहरों यथा दुमका प्रखंड के गांदो (सनकारा राज) के राजभवन, साहेबगंज जिले के तेलियागढी किला एवं लिट्टीपाड़ा प्रखंड के कंचनगढ़ के किले आज विलुप्त होने के कगार पर है़ राज्य सरकार अगर पहल करे, तो इन धरोहरों को बचाया जा सकता है़, अन्यथा एक दिन ये भी विलुप्त हो जायेंगे़
नवल किशोर सिंह, मुखिया, दुमका़
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