क्रिकेट बोर्ड की अकड़
Updated at : 03 Oct 2016 4:57 AM (IST)
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सबसे बड़ी अदालत के फैसलों को मानने से इनकार करने का साहस सरकारों के पास भी नहीं होता है, पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) ने सांस्थानिक सुधारों के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निर्देशों को पूरी तरह मानने से मना कर दिया है. शनिवार को बोर्ड ने एक विशेष बैठक कर न्यायालय द्वारा […]
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सबसे बड़ी अदालत के फैसलों को मानने से इनकार करने का साहस सरकारों के पास भी नहीं होता है, पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) ने सांस्थानिक सुधारों के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निर्देशों को पूरी तरह मानने से मना कर दिया है.
शनिवार को बोर्ड ने एक विशेष बैठक कर न्यायालय द्वारा गठित लोढ़ा समिति की महत्वपूर्ण सिफारिशों को नकार दिया है़ बुधवार को ही न्यायालय ने बोर्ड को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि वह खुद को कानून से ऊपर नहीं समझे. लोढ़ा समिति ने सर्वोच्च न्यायालय को जानकारी दी थी कि क्रिकेट बोर्ड के सभी निर्णय 18 जुलाई को दिये गये आदेश के विपरीत हैं. बोर्ड ने एक राज्य-एक वोट, सदस्यों के लिए अधिकतम आयु सीमा 70 वर्ष करने, चयनकर्ताओंकी संख्या पांच से तीन करने और उनके पास टेस्ट क्रिकेट का अनुभव होने जैसी सिफारिशों को अस्वीकार कर दिया है.
क्या कोई निजी संस्था इस देश के कानूनों और अदालतों से इतर अपनी मर्जी से चलायी जा सकती है? अदालत इस अवहेलना और अवमानना का तो संज्ञान लेगी ही, पर यह पूरा प्रकरण बेहद चिंताजनक है़ क्रिकेट बोर्ड में देश के बड़े-बड़े राजनेताओं और उद्योगपतियों की पैठ है तथा वे बिना किसी रोक-टोक के वर्षों से देश में क्रिकेट के खेल को नियंत्रित करते रहे हैं. एक ओर जहां क्रिकेट का शानदार विकास हुआ है, वहीं बोर्ड में भ्रष्टाचार, घपलों और मनमानी के भी अनेक मामले सामने आये हैं. बोर्ड के कामकाज पर सवालिया निशान लगने के बाद ही सर्वोच्च न्यायालय को दखल देना पड़ा है.
उम्मीद है कि अदालत बीसीसीआइ की इस अकड़ को मिटाने के लिए तुरंत कोई कड़ा फैसला लेगी. एकाध खेलों को छोड़ दें, तो देश में खेलों के लिए बने संगठन सरकार द्वारा ही नियंत्रित हैं. उनमें भी राजनेताओं और नौकरशाहों की जमात काबिज है. ओलिंपिक के बाद शोर मचा था कि खेलों में सुधार के बड़े प्रयास होंगे, पर ऐसा होने के कोई संकेत नहीं हैं. अब समय आ गया है कि सरकार खेलों की दशा और दिशा में सुधार के लिए ठोस कार्रवाई करे और खेल संगठनों का स्वरूप पेशेवर बनाये.
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