सुब्रमण्यन की सलाह

Updated at : 28 Jun 2016 7:13 AM (IST)
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सुब्रमण्यन की सलाह

मुख्य आर्थिक सलाहकार के पद पर नियुक्ति के वक्त अरविंद सुब्रमण्यन ने अपनी भूमिका के बारे में दो बातों का संकेत किया था. पहला, वे एक ऐसी सरकार के लिए काम करने जा रहे हैं, जिसने आर्थिक ‘सुधार और बदलाव’ के लिए जनादेश पाया है और दूसरा, निवेश के लिए अनुकूल हालात बनाना और अर्थव्यवस्था […]

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मुख्य आर्थिक सलाहकार के पद पर नियुक्ति के वक्त अरविंद सुब्रमण्यन ने अपनी भूमिका के बारे में दो बातों का संकेत किया था. पहला, वे एक ऐसी सरकार के लिए काम करने जा रहे हैं, जिसने आर्थिक ‘सुधार और बदलाव’ के लिए जनादेश पाया है और दूसरा, निवेश के लिए अनुकूल हालात बनाना और अर्थव्यवस्था की बुनियादी संरचना में स्थिरता लाना उनकी प्राथमिकता होगी.

अब उन्होंने पटना में एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट (आद्री) की रजत जयंती कार्यक्रम में कहा कि केंद्र ही नहीं, बल्कि हर राज्य में भी मुख्य आर्थिक सलाहकार का पद होना चाहिए, ताकि राज्य का नेतृत्व वैश्वीकृत आर्थिक परिस्थितियों में नये विचार और नीतियों के बारे में सोच सके. परंपरागत तौर पर मुख्य आर्थिक सलाहकार का काम सालाना आर्थिक सर्वेक्षण और साल के मध्य में एक इकोनॉमिक अपडेट तैयार करना होता है.

इस परंपरागत भूमिका के भीतर राज्य सरकारों को आर्थिक बेहतरी के लिए सलाह देना शामिल नहीं है. लेकिन, लीक से हट कर अगर उन्होंने सलाह दी है, तो उसे इसलिए भी ध्यान से सुना जाना चाहिए, क्योंकि रघुराम राजन की तरह ही सुब्रमण्यन भी वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था के विश्व-प्रसिद्ध विशेषज्ञों में गिने जाते हैं.

2011 में ‘फॉरेन पॉलिसी’ पत्रिका ने उन्हें दुनिया के 100 शीर्ष चिंतकों में से एक माना था. सुब्रमण्यन में आर्थिक फैसले लेने के फायदे-नुकसान के आकलन की क्षमता और उसके अनुकूल आलोचना रखने का साहस है. नियुक्ति के बाद नयी सरकार के बजट के बारे में उन्होंने साफ कर दिया था कि उसमें राजस्व की प्राप्ति को लेकर हद से ज्यादा महत्वाकांक्षी उम्मीद पाली गयी है.

इससे पहले विश्व व्यापार संगठन में हो रहे सौदे को लेकर भारत सरकार द्वारा की जा रही देरी के लिए उन्होंने अपनी आलोचना रखी थी. जाहिर है, वैश्विक अर्थव्यवस्था की बारीकियों के जानकार सुब्रमण्यन की कोई भी सलाह व्यक्तिगत राग-द्वेष या राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से अलग हट कर ही होगी. ऐसे में अगर कोई राज्य उनकी राय पर गौर करता है, तो मौजूदा आर्थिक जटिलताओं के अनुरूप अपनी सीमाओं और संभावनाओं को समझने तथा उपलब्ध मौकों की पहचान कर उसका लाभ उठाने की उसकी क्षमता बढ़ेगी ही.

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