पूर्वी-पश्चिमी धुनों के फनकार पंचम दा

अनिल रामचंद्र तोरणो,तलेगांव,पुणो ‘बाप से बेटा सवाई’ यह कहावत चरितार्थ करके दिखानेवाले हिंदी फिल्मों के अद्वितीय संगीतकार थे राहुल देव बर्मन यानी ‘पंचम’. चार जनवरी को उनकी बीसवीं बरसी है. श्रेष्ठ संगीतकार सचिन देव बर्मन के वे होनहार सुपुत्र थे. यह कहना गलत नहीं होगा कि पंचम को अपने पिता से भी ज्यादा ख्याति प्राप्त […]
अनिल रामचंद्र तोरणो,तलेगांव,पुणो
‘बाप से बेटा सवाई’ यह कहावत चरितार्थ करके दिखानेवाले हिंदी फिल्मों के अद्वितीय संगीतकार थे राहुल देव बर्मन यानी ‘पंचम’. चार जनवरी को उनकी बीसवीं बरसी है. श्रेष्ठ संगीतकार सचिन देव बर्मन के वे होनहार सुपुत्र थे. यह कहना गलत नहीं होगा कि पंचम को अपने पिता से भी ज्यादा ख्याति प्राप्त हुई थी. पश्चिमी और पूर्वी संगीत को बेमिसाल तरीके से मिश्रित कर मधुर धुनें बनाने में पंचम माहिर थे. उन्होंने अपने पूरे संगीत जीवन में ज्यादातर किशोर कुमार तथा आशा भोसले जैसे निपुण पाश्र्वगायकों की आवाज के बूते पर अपना एक अलग मुकाम बना लिया था. ताल उनके संगीत की जान थी. फिल्म ‘दोस्ती’ के ‘जानेवालों जरा’ और ‘राही मनवा’ गीतों में मन लुभाने वाला माउथ ऑर्गन पंचम ने ही बजाया था. फिल्म ‘तीसरी मंजिल’ में ‘आरडी’ ने अपने संगीत से शम्मी कपूर को दीवाना बना डाला.
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