जल-संरक्षण की जरूरत

भारत तेजी से पेयजल संकट की ओर बढ़ रहा है. अगले कुछ वर्षों में स्थितियां और विकट हो जायेंगी. महाराष्ट्र के लातूर, उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों से पेयजल समस्या संबंधी आ रही खबरों ने देशवासियों के माथे पर चिंता की लकीरें उभार दी हैं. नदियां, ताल-तलैया सहित जल के अन्य […]
भारत तेजी से पेयजल संकट की ओर बढ़ रहा है. अगले कुछ वर्षों में स्थितियां और विकट हो जायेंगी. महाराष्ट्र के लातूर, उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों से पेयजल समस्या संबंधी आ रही खबरों ने देशवासियों के माथे पर चिंता की लकीरें उभार दी हैं. नदियां, ताल-तलैया सहित जल के अन्य स्रोतों का जलस्तर दिन-ब-दिन कम होता जा रहा है.
चूंकि, जल संसाधन को उद्योगों में तैयार नहीं किया जा सकता, इसलिए जल संकट का समाधान केवल जल के संरक्षण से ही है. शुद्ध जल के निर्ममतापूर्वक दोहन के प्रति स्वयं जागरुक होकर अन्य लोगों को भी इस कार्य हेतु प्रेरित करने तथा इसके सीमित उपयोग से स्थिति नियंत्रण में रखी जा सकती है. सैकड़ों नदियोंवाले भारत देश में यहां के नागरिक ही कहीं प्यासे रह जाएं!
सुधीर कुमार, गोड्डा
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