होली का रूप बदले

Updated at : 28 Mar 2016 12:35 AM (IST)
विज्ञापन
होली का रूप बदले

होली कब की गंद​गी, ​प्रदूषण, ​​अश्लीलता, उत्पीड़न, नशाखोरी, गुंडागर्दी, ​जोर​-​जबरदस्ती, ​झगड़ों ​और हिंसा की प्रतीक बन चुकी है. कहने को तो ​इस बार ​महाराष्ट्र में ​इस भयंकर सूखे ​में सूखी होली मनायी गयी, लेकिन जिस तरह लोग रंगों ​में ​डूबे ​​हुए थे तो क्या ऐसे में उन्हें कपड़े धोने और स्नान आदि के लिए अधिक […]

विज्ञापन
होली कब की गंद​गी, ​प्रदूषण, ​​अश्लीलता, उत्पीड़न, नशाखोरी, गुंडागर्दी, ​जोर​-​जबरदस्ती, ​झगड़ों ​और हिंसा की प्रतीक बन चुकी है. कहने को तो ​इस बार ​महाराष्ट्र में ​इस भयंकर सूखे ​में सूखी होली मनायी गयी, लेकिन जिस तरह लोग रंगों ​में ​डूबे ​​हुए थे तो क्या ऐसे में उन्हें कपड़े धोने और स्नान आदि के लिए अधिक पानी की जरूरत नहीं पड़ी? ​​समय और आवश्यकतानुसार बदलाव जरूरी है, यह सृष्टि का नियम भी है़ ऐसे में इस पर्व को अब ​पवित्रता के साथ ​पौधरोपण​, स्वच्छता ​​के कार्यों​, अच्छी ​सभाओं, संगोष्ठियों और ​शानदार ​इनामी प्रतियोगिताओं आदि के रूप ​में बदलकर मनाने की सख्त जरूरत ​है़.
वेद मामूरपुर, दिल्ली
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola