पूरब पर ध्यान

Updated at : 14 Mar 2016 5:19 AM (IST)
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पूरब पर ध्यान

अपनी बिहार यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार समेत पूर्वी भारत के अन्य राज्यों के सम्यक विकास की जरूरत पर बल दिया है और इस संबंध में सरकार की प्राथमिकता को भी फिर से रेखांकित किया है. राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी केंद्र सरकार से बिहार की उम्मीदों का उल्लेख किया […]

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अपनी बिहार यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार समेत पूर्वी भारत के अन्य राज्यों के सम्यक विकास की जरूरत पर बल दिया है और इस संबंध में सरकार की प्राथमिकता को भी फिर से रेखांकित किया है. राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी केंद्र सरकार से बिहार की उम्मीदों का उल्लेख किया तथा विकास की राह पर कदम से कदम मिला कर चलने का भरोसा दिया.
पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड, बंगाल और उड़ीसा और केंद्र शासित प्रदेश अंडमान एवं निकोबार द्वीप की आबादी करीब 23 करोड़ है, जो कि देश की जनसंख्या का लगभग 20 फीसदी हिस्सा है. इस इलाके का क्षेत्रफल चार लाख वर्ग किलोमीटर से भी अधिक है. यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि मानव संसाधन और प्राकृतिक संपदा से भरपूर पूर्वी भारत न सिर्फ देश का, बल्कि दुनिया के सबसे गरीब और उपेक्षित क्षेत्रों में है. पूर्वोत्तर के राज्यों को शेष भारत से यही इलाका जोड़ता है. इस कारण पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर के विकास का प्रश्न परस्पर जुड़ा हुआ है. आंतरिक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक एवं व्यापारिक संबंध को सुदृढ़ करने के लिए इन राज्यों का ठोस और त्वरित विकास आवश्यक है.
प्रधानमंत्री का यह कहना बिल्कुल सही है कि बिना पूर्वी भारत के आगे बढ़े, भारत का विकास संभव नहीं है. भारत के सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक इतिहास में इस इलाके का व्यापक योगदान रहा है. लेकिन स्वतंत्र भारत में इन राज्यों से संसाधनों का दोहन तो खूब हुआ, लेकिन इनके समुचित विकास पर कम ध्यान दिया गया. इसका नतीजा यह हुआ कि अधिकांश आबादी गरीबी, कुपोषण, अशिक्षा जैसी समस्याओं से ग्रस्त है तथा बेहतर जीवन की तलाश में इन राज्यों के निवासियों को देश के अन्य हिस्सों में पलायन करना पड़ता है.
ये समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं, इस कारण उनके समाधान के लिए भी दूरदर्शी नीतियों और दीर्घकालिक रणनीतियों की जरूरत है. प्रधानमंत्री ने भी इसे रेखांकित करते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के प्रयास करने की बात कही है.
अनेक विश्लेषक मानते हैं कि पूर्वी भारत के पिछड़ेपन का एक बड़ा कारण दशकों से चली आ रही केंद्र और राज्य सरकारों की राजनीतिक खींचतान है. अब जब देश के विकास की गति संतोषजनक है और बिहार समेत अन्य राज्य भी सराहनीय उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं, यह उम्मीद की जा सकती है कि सहकारी संघवाद की प्रतिबद्धताओं के साथ सभी सरकारें परस्पर सहयोग और सहभागिता की भावना से पूर्वी भारत के सर्वांगीण विकास के लिए तत्पर होंगी.
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