यह चुप्पी खतरनाक है
Updated at : 01 Mar 2016 5:58 AM (IST)
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पिछले दिनों प्रधानमंत्री जी ने कहा कि ये गैर सरकारी संगठन वाले मुझे सत्ता से बेदखल करना चाह रहे हैं. क्योंकि उनकी सरकार ने उनसे लेन-देन का हिसाब मांगा और नहीं देने पर उनका पंजीकरण रद्द कर दिया़ प्रधानमंत्री जी की ऐसी बातों से तो लग रहा है कि 20 महीने के कार्यकाल में ही […]
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पिछले दिनों प्रधानमंत्री जी ने कहा कि ये गैर सरकारी संगठन वाले मुझे सत्ता से बेदखल करना चाह रहे हैं. क्योंकि उनकी सरकार ने उनसे लेन-देन का हिसाब मांगा और नहीं देने पर उनका पंजीकरण रद्द कर दिया़ प्रधानमंत्री जी की ऐसी बातों से तो लग रहा है कि 20 महीने के कार्यकाल में ही उन्होंने मैदान छोड़ने का मन बना लिया है़
वरना एनजीओ के पास वह ताकत नहीं कि प्रचंड बहुमत से चुने हुए एकप्रधानमंत्री को अस्थिर कर सकें. वह कहते हैं कि एक परिवार संसद को चलने नहीं दे रहा है और विपक्ष के कारण सारा विकास कार्य रुका पड़ा है़ क्या यह बहानाबाजी नहीं है? वह रेडियो पर तो मन की बात खूब सुनाते हैं, लेकिन समकालीन ज्वलंत मुद्दाें पर चुप्पी साध लेते हैं. इसका अर्थ, जो आम जनता समझती है कि जो कुछ भी हो रहा है, वह प्रधानमंत्री जी की अनुमति से.
जंग बहादुर सिंह, ई-मेल से
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