कानून की नजर में सब लोग बराबर?
Updated at : 29 Feb 2016 6:16 AM (IST)
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क्या पुलिस की नजर में सब लोग बराबर नहीं हैं? अगर होता तो नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के आरोपी नवादा के विधायक राजबल्लभ प्रसाद शायद अब तक पुलिस की हिरासत में होते़ सिर्फ छापेमारी की प्रक्रिया शुरू कर देने से विधायक नहीं मिल जायेंगे़ अगर राज्य की पुलिस चाहे तो विधायक को एक घंटे […]
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क्या पुलिस की नजर में सब लोग बराबर नहीं हैं? अगर होता तो नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के आरोपी नवादा के विधायक राजबल्लभ प्रसाद शायद अब तक पुलिस की हिरासत में होते़ सिर्फ छापेमारी की प्रक्रिया शुरू कर देने से विधायक नहीं मिल जायेंगे़
अगर राज्य की पुलिस चाहे तो विधायक को एक घंटे में आत्मसमर्पण करने के लिए विवश कर सकती है़
इसकी जगह कोई आम आदमी होता और पुलिस को यह पता होता कि वह कौन है और कहां रहता है, तो क्या ऐसी घटना को अंजाम देने वाले को हिरासत में लेने के लिए इतना अधिक समय लगता? वह नेता है तो क्या उनके लिए अलग कानून है? आरोपी का इतने अधिक समय तक पुलिस की पहुंच से दूर रहना बहुत कुछ दर्शाता है़ न्याय का अधिकार हर इनसान को एक जैसा है, पर जब एक विधायक को ही न्याय पर भरोसा नहीं हो तो आम जनता को कैसे होगा?
सुदीप कुमार, रांची
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