पूर्वोत्तर पर ध्यान
Updated at : 06 Feb 2016 6:26 AM (IST)
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के पूर्वी हिस्से के विकास की अपनी सरकार की प्राथमिकता को पुनः रेखांकित किया है. असम के डिब्रूगढ़ में पेट्रोकेमिकल परियोजना का उद्घाटन करते हुए उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि योजनाएं दूरदृष्टि और समुचित तैयारी के साथ बनायी जानी चाहिए. इसमें देरी से लागत कई गुना बढ़ […]
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के पूर्वी हिस्से के विकास की अपनी सरकार की प्राथमिकता को पुनः रेखांकित किया है. असम के डिब्रूगढ़ में पेट्रोकेमिकल परियोजना का उद्घाटन करते हुए उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि योजनाएं दूरदृष्टि और समुचित तैयारी के साथ बनायी जानी चाहिए.
इसमें देरी से लागत कई गुना बढ़ जाती है. उल्लेखनीय है कि पूर्वोत्तर के आठ राज्यों- असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम- के विकास को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र में एक विशेष मंत्रालय है.
चालू पंचवर्षीय योजना में सरकार के योजना बजट का कम-से-कम 10 फीसदी हिस्सा पूर्वोत्तर पर खर्च करने का निर्देश है, जो कि अक्तूबर, 1996 में तय प्रक्रिया के अनुरूप है. ‘एक्ट इस्ट पॉलिसी’ और ‘विजन-2020’ के तहत भी विभिन्न स्तरों पर प्रयास किये जा रहे हैं. उग्रवादी हिंसा और सामाजिक तनाव पर काबू पाने की दिशा में भी प्रगति हुई है.
पूर्वोत्तर में देश की आबादी का 3.8 फीसदी हिस्सा बसर करता है, जबकि क्षेत्रफल में इसका हिस्सा आठ फीसदी है. यहां 1.28 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं और बेरोजगारी की दर भी अधिक है. चूंकि अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है, इसलिए औद्योगिक और सेवा क्षेत्र के विस्तार की बहुत जरूरत है. सिक्किम को छोड़कर अन्य सभी राज्यों में बिजली की भारी कमी है.
देश के राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई की 12 फीसदी सड़कें इस क्षेत्र में हैं, परंतु राज्य सड़कों के आकड़े में पूर्वोत्तर का हिसा सिर्फ 4.1 फीसदी है. इस क्षेत्र में 2,646 किमी लंबा रेल मार्ग है, पर असम को घटा दें, तो अन्य सात राज्यों के हिस्से में मात्र 179 किमी पटरियां ही हैं. नौ हवाई अड्डे चालू हालत में हैं और तीन निर्माणाधीन हैं. पूर्वोत्तर का महत्व हमारे अंतरराष्ट्रीय संबंधों, व्यापार और सुरक्षा की दृष्टि से भी बहुत अधिक है, क्योंकि इस क्षेत्र की 98 फीसदी सीमा पड़ोसी देशों से लगती है.
दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के समूह ‘आसियान’ के साथ भारत ने 2009 में मुक्त व्यापार समझौता किया था और आज वह इस समूह का चौथा सबसे बड़ा व्यापार सहयोगी और आठवां सबसे बड़ा निवेशक है. पूर्वोत्तर के विकास से इसमें और प्रगति होगी. इसके साथ ही पूर्वोत्तर और वहां के लोगों तथा शेष भारत के बीच सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक संबंधों को भी मजबूत करने की जरूरत है.
इसके अभाव के कारण ही अक्सर पूर्वोत्तर हमारी सोच के हाशिये पर चला जाता है. उम्मीद है कि पूर्वोत्तर की बेहतरी के लिए विभिन्न स्तरों पर किये जा रहे प्रयासों से सकारात्मक परिणाम निकलेंगे.
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