बेरोजगारों से काम ले सरकार
Updated at : 06 Feb 2016 6:24 AM (IST)
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योजना बनानेवालों को रोजगारोन्मुखी व समाज को परिवर्तित करनेवाली योजनाएं बनानी चाहिए. भारत के कुछ राज्यों में बेरोजगारी भत्ता के नाम पर एक हजार रुपये प्रतिमाह दिये जाते हैं. यह योजना युवाओं को कुंठित और कमजोर बनानेवाली है. क्योंकि, इस भत्ते से वे न तो कोचिंग की फीस ही चुका पाते हैं और न महंगी […]
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योजना बनानेवालों को रोजगारोन्मुखी व समाज को परिवर्तित करनेवाली योजनाएं बनानी चाहिए. भारत के कुछ राज्यों में बेरोजगारी भत्ता के नाम पर एक हजार रुपये प्रतिमाह दिये जाते हैं. यह योजना युवाओं को कुंठित और कमजोर बनानेवाली है. क्योंकि, इस भत्ते से वे न तो कोचिंग की फीस ही चुका पाते हैं और न महंगी किताबें ही खरीद पाते हैं.
इस उद्देश्यहीन योजना के विपरीत अगर बेरोजगारी भत्ता बढ़ा कर चार-पांच हजार रुपये कर दिया जाये और उन्हें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पार्ट टाइम के रूप में रोजगार उपलब्ध कराया जाये, तो युवाओं के साथ-साथ देश और समाज के लिए अच्छा प्रयास होगा. आज युवा वर्ग निजी संस्थानों में पार्ट टाइम सेवा दे रहा है और अपने कॅरियर पर फोकस कर रहा है. अगर बेरोजगारी भत्ता योजना को पार्ट टाइम नौकरी के रूप में शिक्षा के क्षेत्र में ही लगाया जाये, तो देश और समाज में कई बदलाव लाये जा सकते हैं.
जैसे-
1. प्रत्येक ग्रामीण और शहरी वार्ड क्षेत्रों में शिक्षादूत के रूप में बेरोजगार युवकों को एक-दो वर्ष के लिए पार्ट टाइम अनुबंध के आधार पर चुना जा सकता है.
2. शिक्षादूतों द्वारा पहले तीन माह के अंदर ग्रामीण व शहरी वार्ड क्षेत्रों में निरक्षर लोगों की सूची तैयार करना.
3. निरक्षर महिला, पुरुष को शिक्षादूतों द्वारा साक्षर बनाना.
अगर बेरोजगारी भत्ता की जगह इस तरह की योजनाएं बनायी जायें तो एक वर्ष के अंदर शिक्षा पर सरकार द्वारा किये जा रहे अतिरिक्त योजनाओं से कम खर्च में ही बेरोजगार युवकों के जरिये पूरे देश की तसवीर बदली जा सकती है.
साथ ही सरकारी शिक्षकों से शिक्षण से हट कर कराये जा रहे कार्य के लिए भी बेरोजगारों को अनुबंधित किया जा सकता है. ऐसा किया जाये तो यह युवाओं के साथ-साथ समाज के लिए भी अच्छा प्रयास होगा.
-नीतीश चौधरी, ई-मेल से
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