प्रेरणास्रोत हैं कैंसर पर विजय पानेवाले

डॉ ए के दीवान मेडिकल डायरेक्टर, आरजीसीआइआरसी आज विश्व कैंसर दिवस पर हम कैंसर पर विजय पानेवालों को याद करेंगे, जिन्होंने हर मुश्किल का सामना करते हुए हमें जीवन में आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी है. इस जानलेवा बीमारी का सामना करनेवालों की हिम्मत अतुलनीय है. राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआइआरसी), […]
डॉ ए के दीवान
मेडिकल डायरेक्टर, आरजीसीआइआरसी
आज विश्व कैंसर दिवस पर हम कैंसर पर विजय पानेवालों को याद करेंगे, जिन्होंने हर मुश्किल का सामना करते हुए हमें जीवन में आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी है. इस जानलेवा बीमारी का सामना करनेवालों की हिम्मत अतुलनीय है. राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआइआरसी), दिल्ली ने पिछले साल जुलाई में स्तन, सिर एवं गले के कैंसर के मरीजों के लिए ‘सरवाइवर्स मीट’ का आयोजन किया था.
इसमें सरवाइवर्स से चर्चा करने पर पता चला कि वे सच्चे फाइटर्स हैं. कई महिलाएं बीमारी के दौरान भी काम पर जाती रहीं और अपने कैरियर में सफल भी हैं. उनमें काफी आत्मसम्मान है, स्वयं के प्रति प्रेम की भावना है, वे हार माननेवाली नहीं हैं. उनमें सच्चाई को स्वीकार करने की गहरी भावना है.
कैंसर से जंग जीतनेवाली एक मरीज ने कहा, ‘जिस तरह हीरे को घिसे बिना उसमें चमक नहीं आती, सोने को आग में तपाये बिना शुद्ध नहीं किया जा सकता, उसी तरह अच्छे लोगों के जीवन में परेशानियां आती रहती हैं, लेकिन अनुभव के साथ उनका जीवन बेहतर होता जाता है.’
जब एक मरीज से मैंने पूछा, ‘आपका मतलब है कि ऐसा अनुभव उपयोगी है?’ तो उन्होंने कहा, ‘जी हां! अनुभव एक सख्त टीचर है. जीवन पहले परीक्षा लेता है, फिर पाठ पढ़ाता है.’ सरवाइवर ने माना कि इस बीमारी के बाद उन्होंने अपना दृष्टिकोण, सोच एवं चरित्र बदल लिया है. वे अब अपने जीवन में जोखिम लेना और प्रयोग करना पसंद करते हैं.
जाहिर है, व्यक्ति चाहे तो विपरीत परिस्थितियों को भी सुरक्षित और प्रभावी बना सकता है. मैंने यह भी पाया कि महिलाएं अपनी भावनाओं के साथ समझौता करने और उन्हें स्वीकारने की अधिक अभ्यस्त होती हैं. मैंने एक सरवाइवर से पूछा, ‘आप कठिन समय में आशान्वित कैसे रहती हैं?’
उसने बताया, यह न देखें कि आपको कितनी दूर जाना है, बल्कि हमेशा यह देखें कि अब तक आप कितना आगे बढ़ पाये हैं. ‘ओपन फोरम सेशन’ में एक मरीज से पूछा गया कि वह सबसे अच्छी तरह से जीवन कैसे जी सकता है? तो उसने कहा, ‘अपने अतीत का बिना किसी दुख के सामना करो. अपना वर्तमान आत्मविश्वास के साथ संभालो. भविष्य के लिए बिना किसी डर के तैयारी करो. और यदि आपको मालूम है कि जिंदगी कैसे जीनी है, तो यह बहुत खूबसूरत है.’
कैंसर के गहरे सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव पड़ते हैं. इससे परिवार में गरीबी आती है. एक अनुमान के मुताबिक, सवा अरब की आबादी वाले भारत में हर साल 10 लाख से अधिक लोग कैंसर का शिकार होते हैं. इससे होनेवाली मौतों का आंकड़ा भी काफी है. देश में कैंसर के ज्यादातर मामले तंबाकू के प्रयोग और ऐसी अन्य आदतों से जुड़े हैं, जिन्हें रोका जा सकता है.
स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार और अधिक जागरूकता देश में कैंसर की महामारी का सामना करने में प्रमुख भूमिका निभा सकती है. कैंसर की महामारी से निपटना हम सबकी सामूहिक जिम्मेवारी है. यह तभी संभव होगा, जब हम इसकी समय पर जांच करा लें. इसके लिए व्यापक जागरूकता जरूरी है, जिसमें कैंसर पर जीत हासिल करनेवाले लोग बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.
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