आहत व नेक लोगों के नाम एक खत

Published at :28 Nov 2013 5:32 AM (IST)
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आहत व नेक लोगों के नाम एक खत

।। गुंजेश ।। (प्रभात खबर, रांची) जानता हूं, यह ठीक समय नहीं है कि आप लोगों से कोई कड़वी बात की जाए. लेकिन, फिर भी यही मौका है कि मुझ जैसा खाकसार आपसे कुछ कह सके. आप हद दरजे के शरीफ होने के बाद भी देश, समाज, धर्म आदि के नाम पर बेहद आक्रामक लोग […]

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।। गुंजेश ।।

(प्रभात खबर, रांची)

जानता हूं, यह ठीक समय नहीं है कि आप लोगों से कोई कड़वी बात की जाए. लेकिन, फिर भी यही मौका है कि मुझ जैसा खाकसार आपसे कुछ कह सके. आप हद दरजे के शरीफ होने के बाद भी देश, समाज, धर्म आदि के नाम पर बेहद आक्रामक लोग हैं. असहमति को आप हवा में उछाला गया कोई ऐसा पदार्थ मानते हैं जिसे बाद में आपकी सहमति वाली जमीन पर ही गिरना है.

चूंकि इस समय आप नेक लोग, बेहद सदमे में हैं इसलिए मैं इस मौके का फायदा उठाना चाहता हूं. सबसे पहले तो मैं आप लोगों को बधाई देना चाहता हूं कि आपने तेजपाल के जुर्म की क्या खूब सजा दी. सोशल साइटों पर उनकी बेटी पर हमला बोल कर. बिल्कुल खाप पंचायतों के अंदाज में. आंख के बदले आंख. दूसरे की बेटी पर गंदी नजर डालने-वाले की बेटी को कैसे बख्शा जा सकता है? क्या हुआ, जो उसने घटना के बारे में सुन कर अपने पिता की नहीं, अपनी पीड़िता दोस्त की मदद की, उसके साथ खड़ी हुई. खैर, क्या मैं जान सकता हूं कि आप लोग कैसे एक साथ महिला की आजादी और परंपरा दोनों के रक्षक हो सकते हैं? खास तौर से उस परंपरा के, जिसमें महिलाओं को हमेशा दोयम दरजे का घोषित किया गया है.

जानते हैं, महिला के जिस्म पर कब्जा जमाने की जो इच्छा तेजपाल रखते थे, वह उन्हें परंपरा ने ही सिखाया है. तेजपाल को कड़ी सजा मिले, इसकी तो आप खूब वकालत कर रहे हैं, लेकिन उस परंपरा के खिलाफ हलफनामा किस कचहरी में दाखिल करेंगे? आप ही यह कहावत दुहराते रहते हैं- ‘‘घोड़ा और औरत रान तले ‘‘. पंजाबी में तो आप खुले आम औरतों को अपने से कमतर मानते हुए कहते हैं कि ‘‘स्त्रीनी अक्कल एड़ी मा ‘‘. गुजराती में जब आप औरतों के लिए सोचते हैं तो कहते हैं कि ‘‘उसी जवार बाजरी, मुसी नार पाधरी ‘‘ (नमक मिलाने से ज्वार- बाजरा और मूसल की कुटाई से औरत दुरुस्त होती है) या फिर ‘‘रंडनी जात खासदाने ताले रखेलिज भली ‘‘ (औरतों की जात जूतों के नीचे ही ठीक रहती है)..

किस-किस भाषा के कौन-कौन से जुमले गिनाऊं. हिंदी में तो आपने गालियों की एक लंबी लिस्ट तैयार कर रखी है, जिसके केंद्र में औरत ही है. यकीन मानिए कि आप गजब के लोग हैं, जो एकसाथ दामिनी के साथ बलात्कार के बाद सड़कों पर मोमबत्तियां लिये और फिल्मों में ‘‘बलात्कार-दृश्य ‘‘ रस लेकर देखते पाये आते हैं. तेजपाल का इतिहास तो बहुत छोटा है, पर आपकी परंपरा तो वर्षो से चली आ रही है न! इतिहास के साथ सबसे रोचक बात यही होती है कि हम उसे सुविधा अनुसार याद कर सकते हैं, भूल सकते हैं. लेकिन आप सहृदय लोग ऐसा करेंगे तो कैसे चलेगा? सच-सच कहता हूं, जब कोई औरत किसी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाती है, तब आपकी ‘‘जरूर डिमांड पूरी नहीं हुई होगी ‘‘ वाली टिप्पणी, आपके अंदर के आदमी का पूरा भूगोल बता देती है.

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