प्रकृति का सहचर बनना बेहद जरूरी
Updated at : 04 Nov 2015 4:11 AM (IST)
विज्ञापन

प्रकृति ने सृष्टि की रचना के पहले से ही कुछ नियम निर्धारित कर रखे हैं, लेकिन आज के वैज्ञानिक युग में हम प्राकृतिक नियमों का लगातार उल्लंघन करते जा रहे हैं. पिछले कुछ दशकों से प्रकृति का भरपूर दोहन किया जा रहा है. यह अकेले भारत का ही मामला नहीं है, बल्कि पूरे विश्व में […]
विज्ञापन
प्रकृति ने सृष्टि की रचना के पहले से ही कुछ नियम निर्धारित कर रखे हैं, लेकिन आज के वैज्ञानिक युग में हम प्राकृतिक नियमों का लगातार उल्लंघन करते जा रहे हैं. पिछले कुछ दशकों से प्रकृति का भरपूर दोहन किया जा रहा है.
यह अकेले भारत का ही मामला नहीं है, बल्कि पूरे विश्व में इस प्रकार का नजारा देखा जा सकता है. औद्योगिक इकाइयों, मिल और कारखानों की भरमार है. बिजली उत्पादन के लिए रोजाना नये-नये संयंत्र स्थापित किये जा रहे हैं.
औद्योगिक क्रांति से पूरी दुनिया में प्राकृतिक दोहन के लिए नये-नये तरीके ईजाद किये गये. यहां तक कि खेतों की सिंचाई के लिए भी भूजल का दोहन किया जाने लगा, पेड़ों की जम कर कटाई की गयी और नदियों को बांध दिया गया. इसी का नतीजा है कि आज लोगों को प्राकृतिक आपदाओं के रूप में इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है़
आज शहरीकरण, औद्योगीकरण और प्रकृति के दोहन ने प्राकृतिक संतुलन को पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है. इसी का नतीजा है कि कहीं अनावृष्टि है, तो कहीं अतिवृष्ट, कहीं तूफान आ रहा है, तो कहीं भूकंप. इसके साथ ही पेड़ों की कटाई अधिक होने के कारण मॉनसून भी धोखा देने लगा है. आज देश ही नहीं, पूरी दुनिया में खाद्यान्न संकट उत्पन्न हो गया है.
इसके फलस्वरूप, दुनिया के देशों द्वारा खाद्य सुरक्षा के उपाय किये जा रहे हैं, ताकि दुनिया की आबादी का पेट भरा जा सके. इसके लिए दुनिया भर के देश संयुक्त राष्ट्र तक का दरवाजा खटखटाते हुए नजर आ रहे हैं, ताकि उनके यहां उत्पन्न हुए अनाज का प्रयोग दुनिया के अन्य देशों में होने के पूर्व उनकी आबादी को पेट भरने का अनाज मिल जाये.
लगभग यही स्थिति पानी की भी है. यदि हम प्राकृतिक दोहन की प्रक्रिया को कम करके प्रकृति का सहचर बनने की कोशिश करते, तो आज यह नौबत नहीं आती. आज जरूरत प्रकृति के सहचर बनने की है.
-अनुराग मिश्र, पटना
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




