उम्मीदों के शिखर पर

Updated at : 30 Oct 2015 12:28 AM (IST)
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उम्मीदों के शिखर पर

एक छोटे से घर में सैकड़ों दोस्त समा सकते हैं. इस अफ्रीकी कहावत को भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन में उद्धृत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भरोसा जताया है कि दोनों पक्ष अपने साझा संघर्षों की स्मृतियों और आशाओं से ऊर्जावान होकर बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर हो रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी के साथ अफ्रीकी […]

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एक छोटे से घर में सैकड़ों दोस्त समा सकते हैं. इस अफ्रीकी कहावत को भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन में उद्धृत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भरोसा जताया है कि दोनों पक्ष अपने साझा संघर्षों की स्मृतियों और आशाओं से ऊर्जावान होकर बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर हो रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी के साथ अफ्रीकी महासंघ के अध्यक्ष और जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे तथा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा ने साम्राज्यवाद, निर्धनता, हिंसा जैसी चुनौतियों के विरुद्ध भारत और अफ्रीका के संघर्षों को रेखांकित किया है.
संयुक्त राष्ट्र में अपेक्षित सुधार तथा भारत व अफ्रीका को समुचित प्रतिनिधित्व देने की मांग को सम्मेलन में प्रमुखता से उठाया गया है. इसमें किसी बहस की गुंजाइश नहीं है कि मानव और प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण भारत और अफ्रीका के विकास के बिना वैश्विक विकास और समृद्धि की कल्पना नहीं की जा सकती है.
दोनों क्षेत्रों में दुनिया की एक-तिहाई आबादी बसती है, जिसका बड़ा हिस्सा युवा है. प्रधानमंत्री मोदी और अफ्रीकी नेताओं ने विश्व व्यापार संगठन की शर्तों को विकासशील और अविकसित राष्ट्रों के हितों के अनुकूल बनाने की जरूरत को भी रेखांकित किया है. इस आयोजन की एक विशिष्टता यह भी रही है कि सौर और अन्य गैर-पारंपरिक ऊर्जा-स्रोतों को अपनाने पर बल दिया गया है, ताकि बजट पर बोझ कम करने के साथ पर्यावरण संरक्षण भी हो सके. पिछले कुछ वर्षों से द्विपक्षीय व्यापार में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, लेकिन इसके विस्तार की व्यापक संभावनाएं हैं.
भारत द्वारा अफ्रीका को दिये गये 7.4 बिलियन डॉलर के आसान ऋण तथा 1.2 बिलियन डॉलर के अनुदान के अलावा 10 बिलियन डॉलर के आसान ऋण तथा 600 मिलियन डॉलर के अनुदान की घोषणा प्रधानमंत्री ने की है. भरोसे के ऐसे माहौल में दोनों पक्षों के लिए एक-दूसरे के सीमा-क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां संचालित करने का वातावरण बेहतर होगा.
प्रधानमंत्री ने अफ्रीकी युवाओं के लिए भारत में छात्रवृत्तियों की संख्या 50 हजार तक करने की बात भी कही. अनेक भारतीय कंपनियां अफ्रीकी देशों में तकनीक, संचार, इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि, स्वास्थ्य आदि के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उल्लेखनीय है कि भारत और अफ्रीका की विकास दर तमाम बाधाओं के बावजूद मजबूत बनी हुई है. आनेवाले दिनों में इस उपस्थिति के उत्तरोत्तर सघन होने की उम्मीद है.
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