विधवाओं की दशा पर भी सोचे समाज

Updated at : 24 Oct 2015 12:09 AM (IST)
विज्ञापन
विधवाओं की दशा पर भी सोचे समाज

आज देश-दुनिया के लोग चांद और मंगल पर घर बसाने की बात सोच रहे हैं, लेकिन देश की विधवाओं की दशा ज्यादा नहीं बदली. आज भी उन्हें सामाजिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ रहा है. देश के कई िहस्सों में आज भी िवधवाओं को कई तरह के सामाजिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है. न […]

विज्ञापन

आज देश-दुनिया के लोग चांद और मंगल पर घर बसाने की बात सोच रहे हैं, लेकिन देश की विधवाओं की दशा ज्यादा नहीं बदली. आज भी उन्हें सामाजिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ रहा है.

देश के कई िहस्सों में आज भी िवधवाओं को कई तरह के सामाजिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है. न तो वे खुलकर हंस-बोल सकती हैं और न ही किसी प्रकार का साज-शृंगार ही कर सकती हैं. यहां तक कि कई बार उनके िलए अच्छा पहनने और खाने की भी मनाही होती है.

दुख तो तब होता है, जब विवाह आदि मांगलिक कार्यों में उनका प्रवेश शुभ नहीं माना जाता है. यह हमारे उसी भारतीय समाज का दूसरा चेहरा है, जो प्रतिष्ठा के नाम पर युवतियों को मौत के घाट उतार देता है. आज वही समाज विधवाओं की दशा पर विचार क्यों नहीं करता?

– दक्ष श्रीवास्तव, रांची

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola