उम्मीदों पर पानी फेर रहे हैं बैंक

Updated at : 07 Oct 2015 12:58 AM (IST)
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उम्मीदों पर पानी फेर रहे हैं बैंक

राजीव रंजन झा संपादक, शेयर मंथन बीते 29 सितंबर को अपनी ब्याज दरें घटाने के भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के फैसले पर हर तरफ से सकारात्मक टिप्पणियां ही सुनने को मिली थीं. उद्योग जगत खास तौर पर खुश हुआ. आम लोगों के मन में भी उम्मीदें जगीं कि अब उन्हें सस्ती ब्याज दरों पर आवास […]

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राजीव रंजन झा
संपादक, शेयर मंथन
बीते 29 सितंबर को अपनी ब्याज दरें घटाने के भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के फैसले पर हर तरफ से सकारात्मक टिप्पणियां ही सुनने को मिली थीं. उद्योग जगत खास तौर पर खुश हुआ. आम लोगों के मन में भी उम्मीदें जगीं कि अब उन्हें सस्ती ब्याज दरों पर आवास ऋण (होम लोन) और दूसरे ऋण मिल सकेंगे. ये उम्मीदें इसलिए भी ज्यादा बंधीं कि आरबीआइ ने इस बात की नीतिगत समीक्षा में दरों की कटौती का पूरा लाभ ग्राहकों को दिये जाने की बात कही.
आरबीआइ ने जोर देकर कहा कि नीतिगत दरों में हुई कटौती का लाभ तमाम बैंक आगे अपने ग्राहकों तक भी पहुंचाएं. आरबीआइ पहले भी इस बात को सामने रखता रहा है, मगर इस बार गवर्नर रघुराम राजन ने दो-टूक कहा कि आगे उनका ध्यान इस कटौती का लाभ बैंक ग्राहकों तक पहुंचाने पर होगा. इसका तत्काल असर दिखा और एसबीआइ ने अपनी आधार दर (बेस रेट) में 0.40 प्रतिशत कमी का फैसला किया.
आरबीआइ ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार ने भी बैंकों से ब्याज दरों में कमी कर ग्राहकों को पूरा लाभ देने के लिए कहा है. अरुण जेटली ने 29 सितंबर को आरबीआइ की ओर से दरें घटाने के फैसले के बाद कहा था कि सरकार अपनी ओर से वे सारी स्थितियां सुनिश्चित करेगी, जिससे दरों में इस कमी का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाया जा सके. उन्होंने उम्मीद जतायी थी कि अब बैंक इन कटौतियों का लाभ ग्राहकों को देंगे, जिससे भरोसा बढ़े और निवेश में तेजी आये.
लेकिन लगता है कि बैंक आरबीआइ से मिली राहत का पूरा फायदा अपने ग्राहकों को देने में हिचक रहे हैं. यह बात सामने आयी है कि एसबीआइ ने भले ही अपनी आधार दर में 0.40 प्रतिशत कमी कर दी हो, मगर वह नये ग्राहकों के लिए होम लोन की दरों को केवल 0.20 प्रतिशत ही घटायेगा. जब मैंने बैंक अधिकारियों से पूछा, तो उन्होंने सफाई दी कि आधार दर घटाये जाने के चलते मौजूदा ग्राहकों को तो 0.40 प्रतिशत अंक की कमी का पूरा फायदा मिलेगा. एसबीआइ के होम लोन के मौजूदा ग्राहकों के लिए, जिन्होंने पहले से लोन ले रखा है, ब्याज दरें घट कर 9.30 प्रतिशत और 9.35 प्रतिशत हो गयी हैं.
पुराने ग्राहकों को आरबीआइ से मिली छूट का पूरा लाभ दिया गया है. लेकिन होम लोन के नये ग्राहकों के बारे में वे बता रहे हैं कि उनकी ब्याज दरें हाल की कटौती के बाद 9.50 प्रतिशत और 9.55 प्रतिशत हैं. इस तरह नये ग्राहकों को आरबीआइ से मिली छूट का आधा फायदा ही दिया जा रहा है. वे तर्क दे रहे हैं कि आवास ऋण के नये ग्राहकों के लिए उनकी ब्याज दरें बाजार में अन्य बैंकों की तुलना में सबसे कम हैं. लेकिन यह सवाल तो फिर भी बाकी रह जाता है कि आरबीआइ से मिली छूट का पूरा फायदा इन नये ग्राहकों को भी क्यों नहीं दिया जाये? जाहिर सी बात है कि बैंक वहां अपना मार्जिन थोड़ा अधिक रखने की कोशिश कर रहा है.
वैसे यह दिलचस्प है कि आरबीआइ ने पुराने ग्राहकों को कटौती का पूरा लाभ दिया है और नये ग्राहकों को उतना नहीं दिया है. इससे पहले तो बैंक, खास कर निजी क्षेत्र के बैंक इसका उल्टा करते रहे हैं. दरों में कटौती के पिछले चक्र में यह शिकायत आम थी कि बैंक नये ग्राहकों को तो घटी हुई दर का लाभ दे रहे हैं, पर पहले से जिन ग्राहकों का ऋण चला आ रहा है, उनकी ब्याज दर नहीं घटा रहे हैं.
एसबीआइ का नाम यहां बस उदाहरण के लिए है. इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने अपने अध्ययन में पाया है कि बैंकों ने आरबीआइ की दरों में कटौती के फायदे तो अपने खाते में रख लिये हैं, जबकि इसका नुकसान अपने ग्राहकों की ओर बढ़ा दिया है. 29 सितंबर की कटौती के साथ ही आरबीआइ ने इस साल तीन मौकों पर 0.25 प्रतिशत अंक की कटौतियां की हैं. यानी आरबीआइ की ओर से दरों में की गयी कमी 1.25 प्रतिशत अंक की हो चुकी हैं. मगर बैंकों ने पहले की कटौतियों को भी खुद हजम कर लिया. आरबीआइ ने इस बार मौद्रिक नीति की समीक्षा में भी इस पर सख्त टिप्पणियां की थीं.
इंडिया रेटिंग्स के प्रमुख अर्थशास्त्री सुनील सिन्हा के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों का अध्ययन बताता है कि जब भी आरबीआइ ने अपनी नीतिगत दरों में कमी की, तो बैंक में जमा किये जानेवाले पैसों पर मिलनेवाला ब्याज ज्यादा तेजी से घटाया गया और उनमें कमी की मात्रा भी ज्यादा रही. दूसरी तरफ जब भी आरबीआइ की नीतिगत दरों में इजाफा हुआ, तो बैंकों से लिये जानेवाले ऋण पर ब्याज दरों को जल्दी बढ़ाया गया और जमा (डिपॉजिट) पर मिलनेवाले ब्याज की तुलना में ऋण पर ब्याज में बढ़ोतरी भी ज्यादा की गयी. यानी आरबीआइ की ओर से दरों में चाहे कटौती हो या बढ़ोतरी, बैंक इस उतार-चढ़ाव का इस्तेमाल अपना मार्जिन बढ़ाने में ही करते हैं.
आरबीआइ की दर कटौती के बाद भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआइआइ) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने खुशी जतायी थी कि आरबीआइ ने आखिरकार औद्योगिक गतिविधियों में कमजोरी को पहचाना और इसमें तेजी लाने के लिए ऋण दरों में कमी को स्वीकारा. उन्होंने कहा था कि एक साथ 0.50 प्रतिशत अंक की कमी करने के आरबीआइ के कदम ने उद्योग जगत के लिए उधारी लागत के संबंध में अनिश्चितता को काफी हद तक दूर कर दिया है. अब उद्योग जगत निवेश और विकास दर में सुधार लाने में ज्यादा सक्षम होगा.
उद्योग संगठन फिक्की की अध्यक्ष डॉ ज्योत्स्ना सूरी ने खुशी जताते हुए कहा था कि आरबीआइ के इस कदम से उपभोक्ता मांग और साथ ही व्यापारिक निवेश दोनों को बढ़ावा मिलेगा, खासकर यह देखते हुए कि त्योहारी मौसम करीब है. ब्याज दरों में कमी और कम राशि वाले आवास ऋणों (हाउसिंग लोन) पर लागू जोखिम भारांक (रिस्क वेटेज) घटाने से आवासीय निर्माण में तेजी आयेगी. इसका असर मूल (कोर) क्षेत्रों पर भी होगा और कुल मिला कर निवेश एवं विकास में तेजी आयेगी.
लेकिन चाहे उद्योग जगत हो, या आम उपभोक्ता, अगर बैंक आरबीआइ की कटौती का लाभ आगे अपने ग्राहकों तक बढ़ायेंगे ही नहीं, तो ये उम्मीदें कैसे पूरी होंगी? विकास दर को तेज करने की सरकार की कोशिशें कैसे रंग लायेंगी? अब तक तो सरकार बार-बार आरबीआइ से मनुहार करती रहती थी कि दरें घटानी जरूरी हैं. अब आरबीआइ ने अपना काम तो कर दिया, मगर बैंकों ने उद्योग जगत, आम उपभोक्ता और सरकार, सबकी उम्मीदों पर पानी फेरने का इंतजाम कर दिया है.
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