नये भारत का निर्माण
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :29 Sep 2015 12:51 AM (IST)
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डिजिटल तकनीक की वैश्विक राजधानी मानी जानेवाली सिलिकॉन वैली में तकनीकी कंपनियों के प्रमुखों और एनआरआइ के साथ चर्चाओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की आकांक्षाओं की आत्मविश्वास से पूर्ण रूपरेखा प्रस्तुत की है. आधुनिक तकनीक के बिना विकास की परिकल्पना संभव नहीं है. भारत इस तथ्य से न सिर्फ भली-भांति परिचित है, बल्कि […]
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डिजिटल तकनीक की वैश्विक राजधानी मानी जानेवाली सिलिकॉन वैली में तकनीकी कंपनियों के प्रमुखों और एनआरआइ के साथ चर्चाओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की आकांक्षाओं की आत्मविश्वास से पूर्ण रूपरेखा प्रस्तुत की है. आधुनिक तकनीक के बिना विकास की परिकल्पना संभव नहीं है. भारत इस तथ्य से न सिर्फ भली-भांति परिचित है, बल्कि तकनीक को आत्मसात करने में जोर-शोर से लगा है. प्रधानमंत्री का ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान इसी का अग्रणी सूचक है.
मोदी ने कहा कि भारत ने शास्त्रों से सेटेलाइट तक की यात्रा की है और दुनिया इस सच को स्वीकारने लगी है कि 21वीं सदी भारत की विकास-गाथा का दौर है. देश में प्रतिभाओं के लिए अवसर की कमी के कारण भारतीय मेधा के विकसित देशों की ओर रुख करने का सिलसिला कई दशकों से जारी है. इन प्रतिभाओं ने सिलिकॉन वैली समेत ज्ञान-विज्ञान और उच्च तकनीक के अन्य केंद्रों में अपना उल्लेखनीय योगदान दिया है.
आज जब नयी उम्मीदें परवान चढ़ रही हैं और दुनिया की निगाहें भारत पर टिकी हैं, प्रधानमंत्री ने प्रतिभाओं को भारत का रुख करने का आमंत्रण दिया है. ‘डिजिटल इंडिया’ के तहत देश में सूचना-तंत्र के विस्तार के महत्व और उसकी संभावनाओं को प्रमुख तकनीकी कंपनियों के प्रमुखों ने भी स्वीकार किया है. वे न सिर्फ इस पहल को लेकर उत्सुक हैं, बल्कि इसमें सक्रिय भागीदारी के इच्छुक भी हैं. देश की आशा के लिए यह एक उत्साहजनक स्थिति है कि ऐसी महत्वाकांक्षी योजना की सफलता के लिए आवश्यक सुदृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और उच्च तकनीक के क्षेत्र में कार्यरत बड़ी कंपनियां परस्पर सहयोग की ओर अग्रसर हैं.
सवा अरब से अधिक आबादी का देश भारत अगर तकनीक के विस्तार से आर्थिक विकास और शासकीय लोकतंत्र को बेहतरी की ओर ले जा सका, तो इसके सकारात्मक असर से दुनिया भी अछूती नहीं रहेगी. सिस्को के प्रमुख और अमेरिका-भारत व्यापार परिषद के अगले अध्यक्ष जॉन चैंबर्स ने उचित ही कहा है, ‘अगर आप भारत को बदल सकते हैं, तो विश्व को बदल सकते हैं’.
भारतीय जन-जीवन के विविध पक्षों- वित्तीय समावेशीकरण, हरित ऊर्जा, शासन में पारदर्शिता, इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार आदि- में तकनीक और संसाधनों के समुचित प्रयोग से विकास की राह प्रशस्त करने की जो बातें प्रधानमंत्री ने सिलिकॉन वैली में कही है, उनसे उन उम्मीदों और भरोसे को बल मिला है, जिसकी आस उन्होंने 16 महीने पहले जगायी थी. मोदी ने सही ही कहा है कि देश के करोड़ों युवा बदलाव चाहते हैं और उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए ‘डिजिटल इंडिया’ जैसी योजनाओं की दरकार है.
इसी कड़ी में ‘मेक इन इंडिया’, ‘जन धन योजना’ और ‘स्वच्छता अभियान’ भी आते हैं. इन योजनाओं की अब तक की प्रगति कई अर्थों में संतोषजनक रही है. इनकी सफलता के लिए जहां विदेशी निवेश और तकनीकी सहयोग की आवश्यकता है, वहीं यह भी जरूरी है कि देश के भीतर बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक काम-काज में सुधार हो.
रोजगार बढ़ाने और नागरिकों की क्रय शक्ति मजबूत करने के लिए उत्पादन, आपूर्ति और घरेलू मांग में संतुलन पर ध्यान देने की जरूरत है. आबादी और क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत जैसे विशाल देश में यातायात के साधनों में बेहतरी बहुत जरूरी है. इसके लिए सड़क और रेलमार्गों के साथ जलीय परिवहन के विस्तार की दिशा में भी अभी काफी-कुछ करना होगा. साथ ही, शिक्षा, अनुसंधान और कौशल-विकास को प्राथमिकता देना जरूरी है.
देश की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. समावेशी विकास के प्रयास में सबकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ऐसे समुदायों के लिए सकारात्मक पहलों को गंभीरता से कार्यान्वित करना होगा. सरकारी स्तर पर अनेक नीतियां और कार्यक्रम लागू किये गये हैं और उनका कार्यान्वयन भी हो रहा है, इन प्रयासों में पर्याप्त त्वरा जरूरी है.
इसके लिए संबद्ध विभागों और नौकरशाही में भी ऊर्जा और उत्साह के वही तेवर वांछनीय हैं, जो प्रधानमंत्री के प्रयासों में दृष्टिगोचर हो रहा है.
इस संदर्भ में यह भी उल्लेखनीय है कि बदलाव की कोशिशों को संचालित करने, गति देने और उनके प्रबंधन की जिम्मेवारी सरकार और अधिकारियों की है, लेकिन बतौर नागरिक हम सभी का भी उत्तरदायित्व बनता है कि हम देश के निर्माण और विकास में यथाशक्ति योगदान दें. साझे प्रयासों से भारत के भविष्य के जो तसवीर उभरेगी, वह सुख-समृद्धि का नया इतिहास बनेगी.
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