कोई खास पुस्तक ही पाठ्यक्रम में क्यों

अभी हमारा देश भुखमरी, गरीबी, भाषावाद, क्षेत्रवाद, जातिवाद और साम्राज्यवाद से ग्रस्त है, तो लोग शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, यातायात व परिवहन जैसी समस्याओं से रूबरू हो रहे हैं. इन समस्याओं से निजात पाने के लिए देश की जनता अपने स्तर पर जूझ रही है. ऐसे में देश के एक माननीय केंद्रीय मंत्री द्वारा स्कूली शिक्षा […]
अभी हमारा देश भुखमरी, गरीबी, भाषावाद, क्षेत्रवाद, जातिवाद और साम्राज्यवाद से ग्रस्त है, तो लोग शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, यातायात व परिवहन जैसी समस्याओं से रूबरू हो रहे हैं. इन समस्याओं से निजात पाने के लिए देश की जनता अपने स्तर पर जूझ रही है.
ऐसे में देश के एक माननीय केंद्रीय मंत्री द्वारा स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में किसी खास धर्म की पुस्तकों को शामिल करने का बयान देना कितना जायज है? क्या इस प्रकार का उनका बयान देश के लोगों को उद्वेलित करनेवाला नहीं है?
एक ओर देश के लोग पेट भरने की जुगत में हो और ऐसे में इस प्रकार की बात करने का क्या औचित्य है? यदि पाठ्यक्रम में धार्मिक पुस्तकों को शामिल करना इतना ही जरूरी है, तो सभी धर्मों की पुस्तकों को क्यों नहीं शामिल किया जाता?
बैजनाथ प्रसाद महतो, हुरलुंग, बोकारो
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




