समावेशी विकास से दूर देश के भिखारी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :25 Sep 2015 5:20 AM (IST)
विज्ञापन

अक्सर देश के नेताओं द्वारा लगातार समावेशी विकास की बात की जाती है. लेकिन आज तक देश में कोई ऐसा नेता नहीं हुआ, जो देश के भिखारियों की बात करे. मलीन और झुग्गी बस्तियों में रहनेवालों को पुनर्वासित करने की अनेक योजनाएं बनायी जाती हैं, लेकिन इनके पुनर्वास की आज तक कोई योजना नहीं बनायी […]
विज्ञापन
अक्सर देश के नेताओं द्वारा लगातार समावेशी विकास की बात की जाती है. लेकिन आज तक देश में कोई ऐसा नेता नहीं हुआ, जो देश के भिखारियों की बात करे. मलीन और झुग्गी बस्तियों में रहनेवालों को पुनर्वासित करने की अनेक योजनाएं बनायी जाती हैं, लेकिन इनके पुनर्वास की आज तक कोई योजना नहीं बनायी जा सकी है.
कहीं ऐसा तो नहीं कि देश के भिखारी समावेशी विकास से दूर होते जा रहे हैं. भले ही कोई भिखारियों को भीख देना न पसंद करे, लेकिन किसी न किसी रूप में वह हमारे समाज के अभिन्न अंग हैं.
हालांकि, देश में कई ऐसे लोग भी हैं, जो उन्हीं की तर्ज पर अपने जीवन का कारोबार चलाते हैं, लेकिन उनका तरीका और सड़कछाप भिखारियों के तरीके में अंतर है. सभ्य होते भारतीय समाज और विकासशील भारत की उन्नति और प्रगति में भी कहीं न कहीं उनका भी योगदान है.
– अनुराग मिश्र, पटना
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




