आर्थिक आरक्षण का कोई आधार नहीं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :24 Sep 2015 5:57 AM (IST)
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आरक्षण आज देश में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है. कुछ लोग आरक्षण को सामाजिक और समानता के अधिकार के विपरीत मानते हैं, तो कोई इसे साम्राज्यवाद की विरासत मानता है और ऐसे ही लोग इसे तत्काल समाप्त करने की मांग करते हैं. मेरा मानना है कि क्या आरक्षण समाप्त कर देने भर से ही […]
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आरक्षण आज देश में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है. कुछ लोग आरक्षण को सामाजिक और समानता के अधिकार के विपरीत मानते हैं, तो कोई इसे साम्राज्यवाद की विरासत मानता है और ऐसे ही लोग इसे तत्काल समाप्त करने की मांग करते हैं. मेरा मानना है कि क्या आरक्षण समाप्त कर देने भर से ही समाज में समानता आ जायेगी? आर्थिक आधार पर आरक्षण देने से क्या देश के सभी नागरिक आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो जायेंगे?
भारतीय इतिहास में छूआछूत, हािशयाकरण, जाितवाद, दलितों को मंदिर में प्रवेश पर रोक कोई नयी बात नहीं है. भारत में इस प्रकार की कुप्रथा का विरोध करने के लिए उतनी आवाजें नहीं उठतीं, जितनी िक आरक्षण के विरोध में उठती दिखाई देती हैं. अहम सवाल यह है कि आर्थिक आरक्षण का आखिर आधार क्या है? क्या कोई इस समस्या को सुलझाएगा?
– सुमन कुमार सिंह, जमशेदपुर
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