जीत के निहितार्थ

Published at :24 Aug 2015 11:05 PM (IST)
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जीत के निहितार्थ

फटाफट क्रिकेट के दौर में टेस्ट मैचों की लोकप्रियता कम जरूर हुई है, लेकिन इन्हीं मैचों में खेल के हर पक्ष में प्रतिद्वंद्वी टीमों को जूझते देखा जा सकता है.खिलाड़ियों के कौशल, दम-खम, ध्यान और संतुलन की क्षमता का सही आकलन टेस्ट मैचों के दौरान ही हो पाता है. यही वजह है कि इन मैचों […]

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फटाफट क्रिकेट के दौर में टेस्ट मैचों की लोकप्रियता कम जरूर हुई है, लेकिन इन्हीं मैचों में खेल के हर पक्ष में प्रतिद्वंद्वी टीमों को जूझते देखा जा सकता है.खिलाड़ियों के कौशल, दम-खम, ध्यान और संतुलन की क्षमता का सही आकलन टेस्ट मैचों के दौरान ही हो पाता है.

यही वजह है कि इन मैचों के प्रदर्शन लंबे समय तक याद रहते और रखे जाते हैं. भारत-श्रीलंका के बीच तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला में अब तक हुए दो मैच इस लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण हैं.

गाले में भारत जीतते-जीतते हार गया था, पर कोलंबो के पी सारा ओवल स्टेडियम में भारतीय खिलाड़ी श्रीलंका पर न केवल हावी रहे, बल्कि जीत हासिल करने के क्षण तक उन्होंने अपने संतुलन और नियंत्रण में कोई चूक नहीं होने दी.

यूं तो खेल के गंभीर प्रेमियों के लिए हर गेंद रोमांचक होती है और क्रिकेट एक टीम खेल है, परंतु यह मैच भारत की ओर से अजिंक्य रहाणो, लोकेश राहुल और रविचंद्रन अश्विन तथा श्रीलंकाई टीम की ओर से आर हेरत और ए मैथ्यूज के शानदार प्रदर्शनों के लिए याद किया जायेगा.

अश्विन ने इस मैच में भी पांच विकेट लेकर इस तरह का अपना बारहवां प्रदर्शन किया है. पिछले मैच में भी उन्होंने एक पारी में पांच विकेट चटकाये थे. दूसरी पारी में रहाणो के शतक और लंबी भागीदारी ने भारत को बड़ी बढ़त दे दी थी.

यह भी ध्यान में रखा जाना चाहिए कि इस मैच में एक बड़ा प्रयोग करते हुए रहाणो को उनके स्थायी पांचवें स्थान से हटा कर तीसरे स्थान पर भेजा गया था. ऐसे में उनका शतक, जो उनके कैरियर का चौथा शतक है, नियंत्रण की उनकी क्षमता को सिद्ध करता है.

अश्विन के साथ गेंदबाज अमित मिश्र के लिए भी यह दौरा उपलब्धियों से भरा है. यह जीत पहले टेस्ट की निराशा से उबरने का मौका तो है ही, कप्तान विराट कोहली की बतौर कप्तान पहली जीत होने के कारण भी खास है.

कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब ग्राउंड में 28 अगस्त को जब दोनों टीमें अंतिम टेस्ट मैच के लिए उतरेंगी, तो निश्चित रूप से भारत का आत्मविश्वास सकारात्मक और मनोबल ऊंचा होगा. यह जीत एक साल से अधिक के इंतजार के बाद मिली है.

क्रिकेट के इतिहास में इस मैच को मौजूदा दौर के महानतम खिलाड़ियों में शुमार होनेवाले कुमार संगकारा के आखिरी मैच के रूप में याद किया जायेगा.

अपनी टीम की हार से संगकारा को निराशा जरूर हुई होगी, लेकिन दोनों टीमों और दर्शकों की भाव-विह्वल विदाई को वे हमेशा याद रखेंगे. भारतीय कप्तान विराट कोहली उन्हें अपने प्रेरणास्नेतों में गिनते हैं.

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