गांवों की दशा अब भी दयनीय

Published at :21 Jul 2015 1:20 AM (IST)
विज्ञापन
गांवों की दशा अब भी दयनीय

हमारा देश पहले भी दो भागों में विभाजित था, एक भारत और दूसरा इंडिया. आज भी ये दो पाटों के बीच का फासला बरकरार है.समय बदला, सरकारें बदलीं, लेकिन यदि कुछ नहीं बदला, तो आम आदमी का भाग्य. वैसे तो मैं विकास और आधुनिकता का समर्थक हूं. फिर भी मन में जब-तब कुछ सवाल कौंधते […]

विज्ञापन

हमारा देश पहले भी दो भागों में विभाजित था, एक भारत और दूसरा इंडिया. आज भी ये दो पाटों के बीच का फासला बरकरार है.समय बदला, सरकारें बदलीं, लेकिन यदि कुछ नहीं बदला, तो आम आदमी का भाग्य. वैसे तो मैं विकास और आधुनिकता का समर्थक हूं. फिर भी मन में जब-तब कुछ सवाल कौंधते हैं. जिस देश की 73 फीसदी आबादी अब भी ग्रामीण है और जहां के किसान आये दिन दुनिया से कूच कर रहे हें, वहां सौ स्मार्ट सिटी बनाने की बात कुछ हजम नहीं होती.

दुखद यह भी है कि इसका नाम आते ही लोग ऐसे खुश होते हैं, जैसे चंद रोज में स्मार्ट सिटी बनी और लोग झट उसमें बस गये. जिस देश की रेलगाड़ियों में सवारियों को सुविधाएं प्राप्त करने के लिए इंतजार करना पड़ता हो, वहां बुलेट ट्रेन की बात समझ में नहीं आती. हम तो आज भी अच्छे दिन के इंतजार में बैठे हैं.

नीतीश कुमार निशांत, रांची

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola