भारत-पाक रिश्तों की हकीकत

Published at :20 Jul 2015 12:32 AM (IST)
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भारत-पाक रिश्तों की हकीकत

पाकिस्तान का राष्ट्रीय हित इस कूटनीति में निहित है कि उसको तहत नहस करने पर उतारू आतंकियों के विरु द्ध वह भारत के साथ सच्ची दोस्ती करें ताकि भारत और पाक मिल कर हर किस्म के जेहाद से निर्णायक तौर पर निपट सकें. भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूद लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर जारी […]

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पाकिस्तान का राष्ट्रीय हित इस कूटनीति में निहित है कि उसको तहत नहस करने पर उतारू आतंकियों के विरु द्ध वह भारत के साथ सच्ची दोस्ती करें ताकि भारत और पाक मिल कर हर किस्म के जेहाद से निर्णायक तौर पर निपट सकें.

भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूद लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर जारी गोलाबारी की शुरु आत पाक रेंजरों द्वारा अंजाम दी गयी, जिसका जवाब भारतीय सेना भी दे रही है. पाकिस्तान फौज के कमांडर नहीं चाहते कि नरेंद्र मोदी व नवाज शरीफ के मध्य निर्मित हुई कूटनीतिक समझदारी परवान चढ़े. पाकिस्तान की सत्ता की असली कमान वहां की फौज के हाथों में है और उसकी मर्जी के बिना पाक हुकूमत कोई कदम नहीं उठ सकती. पाकिस्तान द्वारा भारत पर आयद एक और झूठे इल्जाम का पर्दाफाश हो गया है. अपने सरहदी इलाके में एक ड्रोन विमान को गिराने के बाद पाकिस्तान ने भारत पर इल्जाम लगाया कि यह ड्रोन विमान भारत का था. पाकिस्तान के घनिष्ठ दोस्त चीन ने ही इस झूठ का पर्दाफाश कर दिया. ईद के मौके पर सीमा पर बीएसएफ की तरफ से पेश की गयी मिठाई को पाक रेंजरों द्वारा ठुकरा दिया गया.

इन वाकयात से एक कटु तथ्य उभर कर सामने आता है कि विगत 10 जुलाई को नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ की रूस के शहर उफा में कूटनीतिक मुलाकात के पश्चात भारत-पाक संबंधों के सुधरने की जो उम्मीद बंधने लगी थी, फिलहाल वह धूल में मिल गयी है. 16 वर्ष पहले 1999 में भी शरीफ और अटलिबहारी वाजपेयी के मध्य एक कूटनीतिक समझौता हुआ और उसको म़टियामेट करने के लिए मुशर्रफ ने कारगिल पर हमला कर दिया. दस सप्ताह के कारगिल युद्ध में पाक की जबरदस्त शिकस्त हुई और आखिरकार मुशर्रफ द्वारा शरीफ का तख्ता पलट कर दिया गया. पाकिस्तान में नवाज शरीफ की कयादत में नागरिक सरकार सत्तानशीन है, किंतु पाक फौज की असली फितरत आज भी बरकरार है, जोकि कारगिल युद्ध के दौर में थी. कश्मीर में पाकिस्तान विगत 27 वर्षो से प्रॉक्सी वार का संचालन कर रहा है, जिसके तहत धर्मान्ध जेहादियों को पाकिस्तान फौज ने अपना मोहरा बनाया है. प्रारंभ में पाकिस्तान द्वारा जेकेएलएफ तंजीम को कश्मीर में इस्तेमाल किया गया, किंतु 1991 के बाद जेकेएलएफ का परित्याग करके हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए- तैयबा, हरकत-उल-मुजाहिदीन, जैश-ए-मौहम्मद जैसी दहशतगर्द तंजीमों को आइएसआइ द्वारा भारत में जेहादी आंतकवाद का कहर बरपा करने के लिए पाक-अधिकृत कश्मीर में संचालित फौजी शिवरों में प्रशिक्षण और परिपोषण प्रदान किया जाता रहा है.

यह कटु सत्य है कि भारत-पाक के बीच सबसे प्रमुख मसला कश्मीर ही रहा है. 1947 में पहली बार नवनिर्मित पाक फौज ने कबाइलियों की आड़ लेकर कश्मीर पर आक्र मण किया था. जिसका मुहतोड़ उत्तर भारत द्वारा दिया गया. संपूर्ण कश्मीर पर आधिपत्य स्थापित करने की ओर तेजी से बढ़ रही भारतीय सेना को उरी में रोक दिया गया. दुर्भाग्यवश तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू कश्मीर विवाद को संयुक्त राष्ट्र में ले गये और विवाद बुरी तरह से उलझ कर रह गया. भारत और पाकिस्तान के मध्य चार बड़े युद्ध हो चुके हैं और 27 वर्षो से जारी है पाकिस्तान की भारत विरोधी आतंकवादी प्रॉक्सी वॉर, जोकि एक लाख से अधिक लोगों की जान ले चुकी है. आतंकवादी जेहाद के प्रश्न पर पाकिस्तान का पाखंडी रवैया बदस्तूर कायम है. जमात-उद-दावा का प्रमुख सरगना हाफिज सईद जिसके सर पर 50 लाख डॉलर का अमेरिका ने इनाम घोषित किया है उसको हुकूमत-ए-पाकिस्तान का बाकायदा संरक्षण है.

मुंबई हमले का मास्टरमाइंड जकी-उर-रहमान लखवी पाकिस्तान हुकूमत में संरक्षित है. उफा में पहली बार पाकिस्तान ने हर किस्म के आतंकवाद से निपटने की बात कही थी, किंतु दो दिन के अंदर ही अपनी बात से पलट गया और फिर से पुराने कश्मीर राग पर लौट आया. पाकिस्तान का राष्ट्रीय हित इस कूटनीति में निहित है कि उसको तहत नहस करने पर उतारू आतंकियों के विरु द्ध वह भारत के साथ सच्ची दोस्ती करें ताकि भारत और पाक मिल कर हर किस्म के जेहाद से निर्णायक तौर पर निपट सकें. पाकिस्तान के हुक्मरान जेहाद पर अपनी पाखंडी नीति को अपना कर समस्त दुनिया को सदैव धोखा नहीं दे सकते हैं.

अमेरिका भी इस पाखंडपूर्ण रणनीति को समझ चुका है, तभी तो अफगानिस्तान में भारत से भूमिका निभाने की उम्मीद करता है. अमेरिका चाहता है कि अफगानिस्तान में इतिहास दोहराया न जा सके और तालिबान की निर्णायक शिकस्त अफगानिस्तान में हो जाए. अमेरिका ने जेहाद के विरु द्ध पाकिस्तान को प्रदान किये जाने वाली आर्थिक और फौजी इमदाद पर कड़ी निगरानी आयद की है ताकि पहले की तरह इस अमेरिकन फंड का इस्तेमाल कश्मीर के जेहाद के लिए कदापि न किया जा सके. आवश्यकता इस बात की है कि अमेरिका एवं सहयोगी नॉटो देशों को पाकिस्तान को एक आतंकवादी राष्ट्र घोषित करके उस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध आयद करने चाहिए, ताकि पाकिस्तान अपने हित में जेहादियों का उपयोग करने से बाज आ जाए.

प्रभात कुमार रॉय

पूर्व सदस्य राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार परिषद

delhi@prabhatkhabar.in

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