मनुष्य के बढ़ते कदम

Published at :20 Jul 2015 12:27 AM (IST)
विज्ञापन
मनुष्य के बढ़ते कदम

वर्ष 1969 की 20 जुलाई को जब नील आर्मस्ट्रॉंग और उनके पीछे बज आल्ड्रिन ने चांद पर कदम रखा था, तब सिर्फ इतिहास ही नहीं रचा गया था, बल्किअपरिमित खगोलीय ब्रह्मांड में असीमित संभावनाओं के मार्ग भी प्रशस्त हुए थे. अमेरिकी अंतरिक्ष संस्था नासा के अपोलो 11 के उस अभियान के बाद सिर्फ 10 और […]

विज्ञापन
वर्ष 1969 की 20 जुलाई को जब नील आर्मस्ट्रॉंग और उनके पीछे बज आल्ड्रिन ने चांद पर कदम रखा था, तब सिर्फ इतिहास ही नहीं रचा गया था, बल्किअपरिमित खगोलीय ब्रह्मांड में असीमित संभावनाओं के मार्ग भी प्रशस्त हुए थे. अमेरिकी अंतरिक्ष संस्था नासा के अपोलो 11 के उस अभियान के बाद सिर्फ 10 और लोग ही चांद की धरती पर पहुंचे, पर इन 46 वर्षों में विभिन्न आकाशीय पिंडों के बारे में जानकारी जुटाने और वहां पहुंचने की जुगत में मनुष्य ने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं.

नासा के यान मंगल ग्रह पर जा चुके हैं तो भारत का मंगलयान भी मंगल की कक्षा में भ्रमण कर रहा है और नयी जानकारियां मुहैया करा रहा है. चांद पर पहुंचने की वर्षगांठ पर नासा के न्यू होराइजन अंतरिक्ष यान ने सुदूर प्लूटो के बारे में अद्भुत सूचनाएं दी हैं. मंगल, प्लूटो और अन्य खगोलीय पिंडों के निरंतर करीब पहुंचने के इन प्रयासों की नींव 1969 के चांद पर जाने की कवायद में ही है. उससे पहले अंतरिक्ष अभियान अमूमन पृथ्वी की कक्षा तक ही सीमित थे और बहुत कम कोशिशें ही ऐसी थीं, जो निर्वात अंतरिक्ष की टोह लगा रही थीं. परंतु चंद्रमा पर पहुंचना मानव सभ्यता की उस सामूहिक उम्मीद का एक हद तक हकीकत होना था जो यह मानती है कि असंभव जैसी कोई चीज नहीं होती और क्षितिज के परे व्यापक ब्रह्मांड हमारी पहुंच से दूर नहीं है. अंतरिक्ष को टोहने की इस मानवीय प्रयास में भारत विकसित देशों के साथ कदम से कदम मिला कर चल रहा है. भारत ने सोवियत संघ की मदद से 1975 में अपना पहला उपग्रह आर्यभट्ट अंतरिक्ष में भेजा था, लेकिन आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) अनेक भारतीय उपग्रहों समेत दुनिया के 19 देशो के 40 उपग्रह छोड़ चुका है.

इनमें कई यूरोपीय और विकसित देश हैं. भारत के अलावा इसरो के 20 केंद्र विभिन्न देशों में कार्यरत हैं. अंतरिक्ष में शोध और विभिन्न ग्रहों-पिंडों के बारे में जानकारियां जुटा कर मनुष्य न सिर्फअपने वर्तमान की बेहतरी के प्रयास में है, बल्कि भविष्य की नयी मंजिलों की तलाश भी कर रहा है. अपोलो 11 की वह यात्र और मंगलयान की परिक्र मा के साथ अनेक अंतरिक्ष यान हमारी कल्पनाओं को संतुष्ट करने के साथ असीम को छूने की क्षमताओं को भी साध रहे हैं. विभिन्न देशों और संस्थाओं की ये कवायदें क्षुद्रताओं में विभाजित मनुष्यता की सामूहिकता का रेखांकन भी हैं. ये साझा प्रयासों और उपलिब्धयों का विलक्षण उत्सव भी हैं.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola