आतंक के विरुद्ध सजग रहना होगा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :23 May 2015 5:44 AM (IST)
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आतंकवाद आज दुनिया के सामने मौजूद भयावह चुनौतियों में से एक है. कुछ गिने-चुने स्थानों को छोड़कर वैश्विक मानचित्र के हर कोने में आतंक की कमोवेश उपस्थिति है, चाहे वह विचार के रूप में हो, या हिंसा के रूप में. ऐसे में खतरों का आकलन करनेवाली एक संस्था ‘वेरिस्क मैपलक्रॉफ्ट’ ने उन शहरों की एक […]
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आतंकवाद आज दुनिया के सामने मौजूद भयावह चुनौतियों में से एक है. कुछ गिने-चुने स्थानों को छोड़कर वैश्विक मानचित्र के हर कोने में आतंक की कमोवेश उपस्थिति है, चाहे वह विचार के रूप में हो, या हिंसा के रूप में. ऐसे में खतरों का आकलन करनेवाली एक संस्था ‘वेरिस्क मैपलक्रॉफ्ट’ ने उन शहरों की एक सूची जारी की है, जिन पर आतंकी हमले की आशंका है.
इस सूची में 64 शहर हमलों के अत्यधिक खतरे की श्रेणी में हैं, जिनमें दो भारतीय शहर- इम्फाल (मणिपुर) और श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) भी शामिल हैं. आतंकी खतरे की दृष्टि से चेन्नई (तमिलनाडु) पूरी सूची में 176वें स्थान पर है और उसे मध्यम श्रेणी में रखा गया है. इस आकलन में मुंबई, दिल्ली और कोलकाता पर कम खतरा बताया गया है. पिछले कुछ दशकों से भारत के कई छोटे-बड़े शहरों में आतंकी हमले हुए हैं. लेकिन, हमारी सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के कारण बीते कुछ अरसे से ऐसी वारदातें नहीं हो पा रही हैं. साथ ही, देश में शांति के माहौल के साथ विकास का नया भरोसा बना है.
लेकिन, राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक स्थिति में सुधार भारत-विरोधी तत्वों की आंख की किरकिरी बन सकते हैं. ऐसे में यह ताजा आकलन इंगित करता है कि हमें निरंतर सतर्क और सचेत रहना होगा. यह बहुत महत्वपूर्ण नहीं है कि किस शहर में खतरे की कितनी आशंका है. हमले के लिए आतंकी किसी भी शहर या कस्बे का चुनाव कर सकते हैं.
इसलिए हमारी इंटेलिजेंस और सुरक्षा एजेंसियों को बेहतर सहयोग के साथ सक्रिय रहना होगा. पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने एक बार यहां तक कह दिया था कि यह तो ईश्वरीय कृपा है कि हम आतंकी हमलों से बचे हुए हैं. ऐसी बेतुकी समझ को परे रख कर सजगता के साथ काम करने की आवश्यकता है. आतंकियों के पास आज अत्याधुनिक संचार तकनीक और हथियार हैं. उनसे मुकाबले के लिए हमारी पुलिस के पास भी बेहतरीन साजो-सामान की उपलब्धता जरूरी है.
चूंकि आतंकियों के पास एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है, इसलिए उसके विरुद्ध वैश्विक सहभागिकता भी आवश्यक है. दुनियाभर के देशों को स्पष्ट दृष्टि के साथ एकजुट होकर इस खतरे का सामना करना होगा और उन देशों व संगठनों को चिह्न्ति करना होगा, जो आतंक को प्रश्रय देते हैं.
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