हाइटेक शहरों के बीच पिछड़ते गांव
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :20 May 2015 2:29 AM (IST)
विज्ञापन

आज हमारा देश बदलाव एवं आइटी के साथ कदम से कदम मिला कर चल रहा है. लेकिन क्या इस बदलाव की रोशनी गांव में विचर रही कुरीतियों के बादल को छांट पायेगी? हमारा देश गांवों का देश है. हमारी भारत माता का दिल गांव में ही बसता है. क्या शहरों में बदलाव होने भर से […]
विज्ञापन
आज हमारा देश बदलाव एवं आइटी के साथ कदम से कदम मिला कर चल रहा है. लेकिन क्या इस बदलाव की रोशनी गांव में विचर रही कुरीतियों के बादल को छांट पायेगी? हमारा देश गांवों का देश है.
हमारी भारत माता का दिल गांव में ही बसता है. क्या शहरों में बदलाव होने भर से ही हमारे देश की संपूर्ण प्रगति हो सकेगी. आज भी गांवी की मिट्टी में कुरीतियां बरकरार हैं. आज भी गांव में बेटा न होने पर माता-पिता के नक्षत्र को ही दोषी माना जाता है.
लोग उस दंपती का चेहरा भी नहीं देखते. गांव में आज भी डायन एवं भूतों का वर्चस्व बरकरार है. किसी को सफेद दाग होने पर लोग उसके हाथ का पानी भी नहीं पीते हैं. बीमार होने पर लोग आज भी डॉक्टर से पहले ओझा के पास जाते हैं. महिलाओं का जीवन तो सिंदूर, बिंदी और चूड़ियों तक ही सिमटा है. तो क्या यही प्रगति है?
प्रतिभा तिवारी, मधुपुर
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




