ये पप्पू पास क्यों नहीं होता भाई?

Published at :19 May 2015 5:32 AM (IST)
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ये पप्पू पास क्यों नहीं होता भाई?

कुणाल देव प्रभात खबर, जमशेदपुर पप्पू वैसे तो कई बार परीक्षा में फेल हो चुका है, लेकिन इस बार का फेल होना उसे अखर गया. उसकी परीक्षा की तैयारियों में मां ने भी पूरा जोर लगाया था. जवान से बुजुर्ग तक, दर्जनों माहिर लोगों को उसकी तैयारी के लिए लगाया गया था. लोगों ने एक […]

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कुणाल देव

प्रभात खबर, जमशेदपुर

पप्पू वैसे तो कई बार परीक्षा में फेल हो चुका है, लेकिन इस बार का फेल होना उसे अखर गया. उसकी परीक्षा की तैयारियों में मां ने भी पूरा जोर लगाया था. जवान से बुजुर्ग तक, दर्जनों माहिर लोगों को उसकी तैयारी के लिए लगाया गया था.

लोगों ने एक से बढ़ कर एक गुर दिये और मां ने दूध-बादाम का पूरा ध्यान रखा. सुबह-शाम गिलास लेकर पप्पू के पास खड़ी रहतीं.

उन्हें उम्मीद थी कि दूध-बादाम इस बार काम कर जायेगा और पप्पू पर लगा फेल होने का कलंक धुल जायेगा. पप्पू भी मन-बेमन से सड़ासड़ गिलास खाली कर देता. यह देख लगने लगा था कि पप्पू इस बार सीरियस है. आखिर हो भी क्यों नहीं, उसी के उम्र के बच्चे अब कुर्सी संभालने लगे थे और वह पांचवीं भी पास नहीं कर पा रहा था.

मां तो मां होती है. वह चाहती थी कि पप्पू उनके चलते-फिरते ही सेटल हो जाये. इसलिए, वह पढ़ाई के साथ-साथ तमाम टोटके भी करवा रही थीं. उन्होंने कई मंदिरों से विभूति और मजारों से ताबीज मंगवा कर पप्पू के सिरहाने रखवा दिया था. इन टोटकों का प्रभाव कहिये या पप्पू का उत्साह कि उसे पास होने के सपने भी आने लगे थे. लेकिन, जब वह परीक्षा हॉल में गया तो फिर वही गलती कर बैठा, जो बचपन से कर रहा था.

दरअसल, पप्पू जब छोटा था तब उसके पिताजी उसे अपने साथ अपनी सियासी दुकान पर ले जाया करते थे. पप्पू बड़े-बड़े दिग्गजों की गोद में खेलता, उनसे बातें करता. इन सबके बीच पिता को यकीन होने लगा था कि पप्पू एक दिन जरूर उनकी कुरसी संभालेगा.

लेकिन, उनका यह विश्वास ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सका. पहला धक्का तो उसी दिन लगा था, जब उन्होंने पप्पू से पूछा था कि बड़े होकर क्या बनोगे? पप्पू ने कहा था-‘गुलेल लूंगा और चिड़िया मारूंगा.’ तब पापा ने यह सोचकर मन को समझा लिया था कि पप्पू अभी बच्च है. बड़ा होगा तो समझदारी आ जायेगी. लेकिन, पांच साल बाद भी जब पप्पू का जवाब नहीं बदला, तो वह वाकई चिंतित होने लगे. उन्होंने सोचा, शिक्षा से अच्छे-अच्छे बदल जाते हैं, तो शायद पप्पू भी बदल जाये. इसलिए, उन्होंने पप्पू को पढ़ने के लिए विदेश भेज दिया.

लेकिन, पप्पू तो पप्पू था. वहां पांच साल रहने के बावजूद वह पांचवीं पास नहीं कर सका. लेकिन, फेल की डिग्री लेकर भी जब पप्पू लौटा तो उसके पापा दुखी नहीं थे. उन्होंने मान लिया था कि पप्पू पास भले ही नहीं हुआ हो, लेकिन उसकी मनोवृत्ति जरूर बदल गयी होगी. विदेश से लौटने के बाद पप्पू के पापा ने उससे फिर वही सवाल किया.

इस बार उसका जवाब था-‘शादी करूंगा. दहेज लूंगा..’ यह सुन कर तो पप्पू के पापा फूले नहीं समाये, लेकिन जैसे ही पप्पू ने अगली लाइन बोली वह सद्गति को प्राप्त हो गये. पप्पू ने कहा था-‘दहेज में कच्छी लूंगा. कच्छी पुरानी हो जाएगी तो उससे इलास्टिक (रबर) निकालूंगा. गुलेल बनाऊंगा और चिड़िया मारूंगा.’

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