झारखंड में भी हो चिपको आंदोलन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :15 May 2015 5:30 AM (IST)
विज्ञापन

जंगलों और पठारों से घिरा यह प्रदेश अपने नैसर्गिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है. आज जिस तरह जंगल और पहाड़ काटे जा रहे हैं और खनिजों का बेहिसाब दोहन हो रहा है, उससे ‘झारखंड’ को ‘बंजरखंड’ होने में देर नहीं लगेगी. बीते वर्षो में 38 पहाड़ गायब हो गये हैं. वहीं, अब भी 20 […]
विज्ञापन
जंगलों और पठारों से घिरा यह प्रदेश अपने नैसर्गिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है. आज जिस तरह जंगल और पहाड़ काटे जा रहे हैं और खनिजों का बेहिसाब दोहन हो रहा है, उससे ‘झारखंड’ को ‘बंजरखंड’ होने में देर नहीं लगेगी. बीते वर्षो में 38 पहाड़ गायब हो गये हैं.
वहीं, अब भी 20 हजार अवैध उत्खनन दिन-रात झारखंड को तोड़ने में लगे हैं.
प्रशासन व सरकार सो रहे हैं. शायद यहां की जनता ने भी इसे अपनी नियति मान कर आंखें बंद कर ली है. न तो यहां अब जल, जंगल और जमीन के लिए कोई आंदोलन होता है और न ही कोई संगठन इनकी रक्षा के लिए मुहिम चलता है. सब अपनी-अपनी रोटी सेंकने में व्यस्त हैं.
प्रकृति को अपना देवता माननेवाले समुदाय के होते हुए भी इस प्रदेश में चिपको जैसा कोई आंदोलन खड़ा नहीं किया गया है, जबकि इसकी सख्त जरूरत है.
नीतीश कुमार निशांत, रांची
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




