जल संकट के हल की दिशा में कदम

Published at :17 Apr 2015 5:45 AM (IST)
विज्ञापन
जल संकट के हल की दिशा में कदम

झारखंड कैबिनेट ने राज्य की जल नीति को मंजूरी दे दी है. साथ ही जल संसाधन आयोग के गठन का भी फैसला किया है. राज्य बनने के 14 साल बाद ये फैसले लिये गये हैं. ये अतिमहत्वपूर्ण फैसले हैं जिनका दूरगामी प्रभाव पड़ेगा. सच यह है कि राज्य के कई हिस्सों में पानी की गंभीर […]

विज्ञापन
झारखंड कैबिनेट ने राज्य की जल नीति को मंजूरी दे दी है. साथ ही जल संसाधन आयोग के गठन का भी फैसला किया है. राज्य बनने के 14 साल बाद ये फैसले लिये गये हैं. ये अतिमहत्वपूर्ण फैसले हैं जिनका दूरगामी प्रभाव पड़ेगा. सच यह है कि राज्य के कई हिस्सों में पानी की गंभीर समस्य़ा है.
रांची, जमशेदपुर, चास, गोड्डा, झरिया, धनबाद, रामगढ़ के कई ऐसे इलाके हैं जहां भूगर्भ जल का अतिदोहन हो रहा है. राजधानी रांची का कांके इलाका भी ऐसा ही क्षेत्र है. यहां जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है. बड़े-बड़े अपार्टमेंट बन चुके हैं. गहरी बोरिंग कर धरती से बड़े पैमाने पर पानी निकाला जा रहा है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि सरकार के पास कोई जल नीति नहीं थी.
अब उम्मीद है कि सरकार इस समस्याओं के निदान का प्रयास करेगी. संभव है कि जिन क्षेत्रों में जलस्तर का संकट गहरा है, वहां बोरिंग पर रोक लगायी जाये. यह स्थायी समाधान नहीं है. हर व्यक्ति को पानी चाहिए. पीने और घरेलू उपयोग के लिए पानी चाहिए. खेती के लिए पानी चाहिए और उद्योग के लिए भी पानी चाहिए. अब प्राथमिकता तय करनी होगी. झारखंड को प्रकृति पर्याप्त मात्र में वर्षा के रूप में पानी देती है. यहां साल में औसतन 1400 मिलीमीटर वर्षा होती है. दुखद है कि वर्षा के पानी को हम रोक नहीं पाते, जमा नहीं कर पाते और यह पानी नाले-नदी के जरिये बह जाता है.
हमें जल-छाजन की दिशा में काम करना होगा. शहरों में कंक्रीट का जाल बिछ रहा है, जिसे कम करना होगा. कड़े नियम बनाने होंगे, ताकि वर्षा का पानी बह कर जाने के बजाय धरती में जाये. इससे जल स्तर बढ़ेगा. बोरिंग पर लगाम लगाने के लिए सप्लाई के पानी की व्यवस्था करनी होगी. डैमों की सफाई करनी होगी और ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि बरसात के मौसम में डैम पानी से भर जाये. जल नीति बनने से अब किसानों को भी राहत होगी.
कृषि के लिए भी कैसे पर्याप्त पानी मिले, यह सरकार देखेगी. राज्य में उद्योगों कमी नहीं है. उन्हें भी पानी चाहिए. अगर अभी चेता नहीं गया तो वह दिन भी दूर नहीं होगा जब पानी के अभाव में उद्योग बंद होने लगेंगे. प्रकृति ने झारखंड को बहुत संसाधन दिये हैं. इनमें पानी भी एक है. इसका बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित कराना होगा. जल नीति बनाना इसी अभियान का हिस्सा है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola