सरकारी अस्पतालों का माहौल सुधारें

Published at :04 Apr 2015 5:14 AM (IST)
विज्ञापन
सरकारी अस्पतालों का माहौल सुधारें

बिहार, झारखंड दोनों राज्य डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं. बिहार ने यह कमी दूर करने के लिए कांट्रेक्ट पर रखे गये डॉक्टरों को नियमित करने के साथ उनकी रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने जैसे उपाय पर विचार कर रही है. फौरी तौर पर डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए यही रास्ता भी बचा […]

विज्ञापन
बिहार, झारखंड दोनों राज्य डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं. बिहार ने यह कमी दूर करने के लिए कांट्रेक्ट पर रखे गये डॉक्टरों को नियमित करने के साथ उनकी रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने जैसे उपाय पर विचार कर रही है. फौरी तौर पर डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए यही रास्ता भी बचा है.
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का एक अलग ही मामला है. दोनों ही राज्यों में ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित रेफरल या अनुमंडलीय अस्पतालों में बाल रोग विशेषज्ञों की कमी के कारण तकरीबन हर डॉक्टर एक से अधिक अस्पतालों के प्रभार में है. इसी तरह स्त्री रोग विशेषज्ञों का भी घोर अभाव है. यह अभाव केवल इस कारण नहीं है कि सेवा शर्ते अच्छी नहीं है. डॉक्टरों की मानें तो सरकारी अस्पतालों में काम का माहौल नहीं है.
दोनों ही सरकारों ने सन 2000 से स्थायी डॉक्टरों की नियुक्ति को ताक पर रख कर कांट्रेक्ट से ही काम चलाना शुरू कर दिया. कांट्रेक्ट में वेतन ठीक-ठाक मिलने के बाद भी उस तरह की सुरक्षा का भाव नहीं पैदा कर पाता है, जैसा स्थायी नियुक्ति में होता है. जब सुरक्षा को लेकर ही डॉक्टरों में चिंता रहती है, तो बेहतर काम की उम्मीद ही बेमानी है. रिम्स हो या पीएमसीएच दोनों मेडिकल कालेज व अस्पताल में सबसे ज्यादा मरीज गरीब ही पहुंंचते हैं. दरअसल ये सरकारी मेडिकल कालेज व अस्पताल ही गरीबों के लिए उम्मीद की आखिरी किरण हैं. सरकारें भी उनके लिए हर संभव स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने का राग अलापती है, लेकिन इन संस्थानों में डॉक्टर अपनी सेवा देने के लिए तत्पर हो, इसके लिए जो माहौल बनाने की जरूरत है उसे लेकर अधिकारियों व राजनेताओं को चिंता नहीं है. अगर सरकारें इस समस्या को लेकर संजीदा हैं, तो डॉक्टरों की कमी दूर करने का पूरा रोडमैप तैयार किया जाना चाहिए.
पीएचसी से लेकर मेडिकल कालेजों की व्यवस्था में सुधार के लिए विशेषज्ञों के सुझावों को शामिल करना चाहिए. तकरीबन तीन साल पहले फिक्की ने बिहार व झारखंड के सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था सुधार के लिए एक रिपोर्ट सौंपी थी. इस रिपोर्ट पर अधिकारियों ने गौर ही नहीं किया है. अब समय है कि फिर से उस रिपोर्ट को नये सिरे से देखा जाये. और उसमें जो सुझाव दिये गये हैं, उसे प्राथमिकता से लागू किया जाये.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola